रायपुर, 16 जून 2026
वस्तु एवं सेवा कर आसूचना महानिदेशालय (DGGI) की रायपुर जोनल यूनिट ने करीब 6.93 करोड़ रुपये के फर्जी GST क्रेडिट मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए ओम किरण इस्पात उद्योग के पार्टनर हरीश वाधवानी को गिरफ्तार किया है। जांच में खुलासा हुआ है कि कंपनी ने बिना वास्तविक माल खरीदे फर्जी बिलों के आधार पर करोड़ों रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) प्राप्त किया और उसका उपयोग भी किया।
फर्जी कंपनियों के जरिए लिया टैक्स लाभ
डीजीजीआई की जांच में सामने आया कि संबंधित कंपनी ने ऐसे कारोबारियों से बिल प्राप्त किए, जिनकी फर्में केवल कागजों में संचालित थीं। इनमें से कई कंपनियों के GST पंजीकरण बाद में रद्द या निलंबित कर दिए गए थे। इन फर्जी बिलों के आधार पर कंपनी ने लगभग 7 करोड़ रुपये का टैक्स लाभ हासिल किया।
पांच महीने तक गिरफ्तारी से बचता रहा आरोपी
जांच एजेंसी के अनुसार, हरीश वाधवानी पिछले करीब पांच महीने से फरार चल रहा था। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने विभिन्न अदालतों में अग्रिम जमानत की याचिकाएं दायर कीं, लेकिन उसे कहीं से राहत नहीं मिली। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां से भी उसकी याचिका खारिज कर दी गई। इसके बाद डीजीजीआई ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
बड़े नेटवर्क की जांच जारी
यह कार्रवाई एडिशनल डायरेक्टर जनरल सुजीत मलिक के नेतृत्व में की गई। अधिकारियों का मानना है कि मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं हो सकता। जांच की जा रही है कि फर्जी बिलिंग नेटवर्क कितना बड़ा है और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं। जांच के आधार पर आने वाले दिनों में अन्य गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।
क्या होता है फर्जी ITC?
फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) वह स्थिति होती है जब कोई व्यापारी बिना वास्तविक माल खरीदे या फर्जी दस्तावेजों के आधार पर टैक्स में छूट या क्रेडिट का लाभ लेता है। इससे सरकार को भारी राजस्व नुकसान होता है और यह GST कानून के तहत गंभीर अपराध माना जाता है।
GST कानून में कड़ी सजा का प्रावधान
विशेषज्ञों के अनुसार, फर्जी इनवॉइस जारी करना या प्राप्त करना GST अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध है। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर जेल और आर्थिक दंड दोनों का प्रावधान है। डीजीजीआई ने स्पष्ट किया है कि GST चोरी, फर्जी बिलिंग और अवैध वित्तीय गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।


