जयपुर,9 जून 2026
राजस्थान की राजधानी जयपुर अपनी भव्य इमारतों, ऐतिहासिक किलों, महलों और रंगीन बाजारों के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। यही वजह है कि हर साल लाखों पर्यटक यहां घूमने आते हैं। लेकिन जयपुर की सबसे खास पहचान उसका गुलाबी रंग है, जिसके कारण इसे ‘पिंक सिटी’ कहा जाता है।
हालांकि, बहुत कम लोग जानते हैं कि जयपुर हमेशा से गुलाबी नहीं था। इसके पीछे करीब 150 साल पुरानी एक दिलचस्प कहानी जुड़ी हुई है।
महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने बसाया था जयपुर
जयपुर शहर की स्थापना 18 नवंबर 1727 को महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने की थी। शहर की रूपरेखा प्रसिद्ध वास्तुकार विद्याधर भट्टाचार्य ने तैयार की थी। जयसिंह के नाम पर ही इस शहर का नाम जयपुर रखा गया।
ब्रिटिश शाही मेहमानों के स्वागत में बदला शहर का रंग
इतिहासकारों के अनुसार, वर्ष 1876 में प्रिंस ऑफ वेल्स अल्बर्ट एडवर्ड के जयपुर आगमन की तैयारी की जा रही थी। उस समय शहर के शासक महाराजा सवाई राम सिंह द्वितीय ने शाही मेहमानों के स्वागत के लिए पूरे शहर को गुलाबी रंग से रंगने का निर्णय लिया।
उस दौर में गुलाबी रंग को मेहमाननवाजी, सम्मान और स्वागत का प्रतीक माना जाता था। इसलिए शहर की प्रमुख इमारतों, बाजारों और भवनों को गुलाबी रंग से सजाया गया।
गुलाबी रंग बन गया जयपुर की पहचान
शाही मेहमानों को यह सजावट बेहद पसंद आई। इसके बाद शहर के शासकों ने इस रंग को स्थायी रूप से बनाए रखने का फैसला किया। धीरे-धीरे गुलाबी रंग जयपुर की पहचान बन गया और आज भी पुराने शहर के अधिकांश भवन इसी रंग में दिखाई देते हैं।
जयपुर में घूमने की प्रमुख जगहें
हवा महल: अपनी अनोखी खिड़कियों और वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध।
सिटी पैलेस: राजघराने के इतिहास और शाही वैभव का शानदार उदाहरण।
जंतर-मंतर: यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल और खगोलीय उपकरणों का अद्भुत संग्रह।
अल्बर्ट हॉल म्यूजियम: राजस्थान के सबसे पुराने संग्रहालयों में से एक।
शाम की रोशनी में और निखरती है पिंक सिटी
दिन में गुलाबी इमारतों की खूबसूरती पर्यटकों को आकर्षित करती है, वहीं शाम के समय रोशनी से जगमगाता जयपुर किसी शाही नगरी जैसा दिखाई देता है। यही कारण है कि इसे भारत के सबसे खूबसूरत और लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में गिना जाता है।
