रायपुर, 28 अक्टूबर 2026
छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के दौरान धान बेचने वाले किसानों को बड़ी राहत मिलने जा रही है। अब किसानों को धान विक्रय का टोकन प्राप्त करने के लिए सोसायटियों में लंबी कतारों में लगने की जरूरत नहीं होगी। राज्य सरकार इस वर्ष भी ‘तुंहर टोकन’ मोबाइल एप के माध्यम से ऑनलाइन टोकन की सुविधा जारी रखेगी। किसान इस एप के जरिए घर बैठे 24×7 टोकन प्राप्त कर सकेंगे।
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग द्वारा संचालित यह मोबाइल एप गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है। ऑनलाइन टोकन व्यवस्था से किसानों के समय और श्रम की बचत होगी। साथ ही धान खरीदी की प्रक्रिया अधिक सुगम और व्यवस्थित बनेगी।
जोत के अनुसार किसानों को मिलेंगे टोकन
राज्य सरकार ने किसानों की जोत के आधार पर टोकन की संख्या निर्धारित की है, ताकि वे अपनी पात्रता के अनुसार धान बेच सकें।
- दो एकड़ तक के किसान: एक टोकन।
- दो एकड़ से अधिक और 10 एकड़ तक के किसान: अधिकतम दो टोकन।
- 10 एकड़ से अधिक रकबे वाले किसान: अधिकतम तीन टोकन।
इस व्यवस्था से किसानों को अपनी सुविधा और उपलब्धता के अनुसार धान विक्रय की योजना बनाने में मदद मिलेगी। ऑनलाइन टोकन प्राप्त करने के लिए उन्हें बार-बार सोसायटियों के चक्कर भी नहीं लगाने पड़ेंगे।
कम धान बेचने पर शेष रकबा नहीं होगा लैप्स
इस वर्ष की धान खरीदी व्यवस्था में किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण सुविधा जारी रहेगी। यदि कोई किसान एक टोकन में अपनी पूरी पात्र मात्रा का धान नहीं बेच पाता है, तो उसकी शेष पात्रता समाप्त नहीं होगी।
किसान अपनी बची हुई पात्र मात्रा का धान दूसरे या तीसरे टोकन के माध्यम से बेच सकेंगे। इससे उन किसानों को राहत मिलेगी, जो किसी कारणवश एक बार में अपनी पूरी पात्र मात्रा का धान उपार्जन केंद्र पर नहीं ला पाते हैं।
इसके अलावा, किसानों को टोकन में धान की मात्रा दर्ज करने की सुविधा भी मिलेगी। किसान अपनी आवश्यकता और उपलब्धता के अनुसार मात्रा दर्ज करके टोकन प्राप्त कर सकेंगे।
किसानों के समय और मेहनत की होगी बचत
राज्य सरकार का उद्देश्य धान विक्रय प्रक्रिया को किसानों के लिए अधिक सुविधाजनक बनाना है। ‘तुंहर टोकन’ एप से ऑनलाइन टोकन, जोत के अनुसार टोकन की सुविधा और शेष धान बेचने का विकल्प किसानों को अपनी उपज बेचने में सहूलियत प्रदान करेंगे।
खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में ऑनलाइन टोकन व्यवस्था जारी रहने से किसानों को टोकन के लिए सोसायटियों में लंबी कतारों में लगने की परेशानी से राहत मिलेगी। किसान अपनी सुविधा के अनुसार टोकन प्राप्त कर निर्धारित प्रक्रिया के तहत धान बेच सकेंगे।



