रायपुर, 15 अक्टूबर 2026
छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत बनाने और आम नागरिकों को समय पर बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग के कामकाज की उच्चस्तरीय समीक्षा की। मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य सुविधाओं की गुणवत्ता और सहज उपलब्धता राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अस्पतालों में डॉक्टरों, दवाइयों, जांच सुविधाओं और चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाएं सीधे आम नागरिकों के जीवन और परिवार की सुरक्षा से जुड़ी हैं। इसलिए प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को आवश्यकता पड़ने पर समय पर गुणवत्तापूर्ण उपचार मिलना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार के साथ सेवाओं की गुणवत्ता और दूरस्थ क्षेत्रों तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, संचालनालय चिकित्सा शिक्षा, छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन, आयुष एवं राष्ट्रीय आयुष मिशन तथा खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अंतर्गत संचालित योजनाओं और आगामी कार्ययोजनाओं की समीक्षा की गई।
भविष्य की जरूरतों के अनुसार तैयार होगी स्वास्थ्य सुविधाओं की कार्ययोजना
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश की बढ़ती आबादी और भविष्य की स्वास्थ्य आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य अधोसंरचना के विकास की दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में जनसंख्या, भौगोलिक परिस्थितियों, मौजूदा चिकित्सा सुविधाओं और भविष्य की जरूरतों का आकलन किया जाए।
मुख्यमंत्री ने अस्पतालों में आवश्यकता के अनुसार बिस्तरों की संख्या बढ़ाने, विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं का विस्तार करने और नवगठित जिलों में जरूरी सुविधाओं को प्राथमिकता से विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि केवल अस्पताल भवनों का निर्माण पर्याप्त नहीं है, बल्कि वहां डॉक्टर, स्वास्थ्यकर्मी, दवाइयां, उपकरण और जांच सुविधाएं भी उपलब्ध होनी चाहिए।
जिला अस्पतालों से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक मिलेंगी जरूरी सुविधाएं
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जिला अस्पतालों से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक आवश्यक दवाइयों और जांच सुविधाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। मरीजों को सामान्य जांच और उपचार के लिए अनावश्यक परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।
उन्होंने चिकित्सा उपकरणों के नियमित रखरखाव और समय पर मरम्मत के निर्देश देते हुए कहा कि किसी भी महत्वपूर्ण उपकरण को लापरवाही के कारण लंबे समय तक बंद नहीं रहना चाहिए।
बैठक में स्वास्थ्य संस्थानों में रिक्त पदों, मानव संसाधन की उपलब्धता और भर्ती प्रक्रिया की समीक्षा भी की गई। मुख्यमंत्री ने भर्ती संबंधी प्रक्रियाओं में तेजी लाने पर जोर दिया, ताकि अस्पतालों में पर्याप्त चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी उपलब्ध हो सकें।
अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के 1,045 स्वास्थ्य संस्थानों में अटल आरोग्य लैब संचालित हैं। डायलिसिस, ट्रॉमा केयर, ब्लड बैंक, आईसीयू और सीटी स्कैन जैसी सुविधाओं का भी विस्तार किया जा रहा है। वर्तमान में 33 स्थानों पर डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध है और 25 नए डायलिसिस केंद्र प्रारंभ किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने ई-हॉस्पिटल, आभा और अन्य डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभावी उपयोग के निर्देश भी दिए, ताकि मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
सुरक्षित प्रसव और मातृ-शिशु स्वास्थ्य पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री साय ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सरकार की महत्वपूर्ण प्राथमिकता बताते हुए गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच, पोषण, चिकित्सा देखभाल और सुरक्षित संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक प्रसव सुरक्षित हो और जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ रहें। इसके लिए स्वास्थ्य संस्थानों में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ प्रसूता महिलाओं की सुरक्षा, गरिमा और सुविधा का विशेष ध्यान रखा जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में मातृ मृत्यु दर में कमी आई है, लेकिन अभी और बेहतर परिणाम हासिल करने की जरूरत है। उन्होंने मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर को राष्ट्रीय औसत के करीब लाने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।
बैठक में पूर्ण टीकाकरण, विशेष पिछड़ी जनजातियों में टीकाकरण, मलेरिया नियंत्रण, कुष्ठ रोग निवारण और टीबी उन्मूलन कार्यक्रमों की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने दूरस्थ एवं जनजातीय क्षेत्रों में बीमारियों की समय पर पहचान और उपचार की व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया।
दुर्गम क्षेत्रों में एम्बुलेंस नहीं पहुंचे तो बनेगी वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 108 संजीवनी एक्सप्रेस और 102 महतारी एक्सप्रेस सेवाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि आपात स्थिति में मरीज तक समय पर चिकित्सा सहायता पहुंचना बेहद जरूरी है।
उन्होंने निर्देश दिए कि जिन दुर्गम, वनांचल और दूरस्थ क्षेत्रों में सड़क या भौगोलिक परिस्थितियों के कारण एम्बुलेंस नहीं पहुंच सकती, वहां स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था विकसित की जाए। मरीजों को गांव से एम्बुलेंस प्वाइंट या नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए व्यावहारिक इंतजाम किए जाएं।
बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश में 108 संजीवनी एक्सप्रेस के तहत 375 एम्बुलेंस और 102 महतारी एक्सप्रेस के तहत 380 वाहन उपलब्ध हैं। जनवरी से अगस्त 2026 के बीच महतारी एक्सप्रेस सेवा से 2 लाख 19 हजार से अधिक हितग्राही लाभान्वित हुए हैं।
मुख्यमंत्री ने एम्बुलेंस सेवाओं की समयबद्ध उपलब्धता और प्रभावी संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि किसी भी मरीज को आपातकालीन स्थिति में परेशानी न हो।
परिजन को शव वाहन के लिए परेशान न होना पड़े
मुख्यमंत्री ने शव वाहन सेवाओं को मजबूत बनाने और स्वास्थ्य सेवाओं में मानवीय संवेदनाओं को सर्वोपरि रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी परिजन को खोना परिवार के लिए बेहद कठिन समय होता है। ऐसे समय में शव वाहन जैसी बुनियादी सुविधा के लिए परिजनों को परेशान नहीं होना चाहिए।
उन्होंने अस्पतालों में मृत्यु होने की स्थिति में शव वाहन की सुविधा सहजता और समय पर उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित करने को कहा। साथ ही मरीज और उसके परिवार की गरिमा एवं संवेदनाओं का सम्मान सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
सिकल सेल उन्मूलन और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं पर भी फोकस
मुख्यमंत्री ने सिकल सेल रोग की रोकथाम, जांच, उपचार और जनजागरूकता कार्यक्रमों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि सिकल सेल एक आनुवंशिक बीमारी है और इससे बचाव के लिए समय पर जांच तथा उचित परामर्श जरूरी है।
उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में स्क्रीनिंग और परामर्श सेवाओं का विस्तार करने के साथ विवाह पूर्व स्वैच्छिक जांच एवं आनुवंशिक परामर्श के प्रति लोगों को जागरूक करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने वर्ष 2047 तक सिकल सेल उन्मूलन के लक्ष्य की दिशा में योजनाबद्ध प्रयास करने पर जोर दिया।
मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा के दौरान उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य भी समग्र स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है। समाज में जागरूकता बढ़ाने के साथ परामर्श और उपचार सुविधाओं की जानकारी आम नागरिकों तक पहुंचाई जाए, जिससे जरूरतमंद लोगों को समय पर सहायता मिल सके।
बैठक में आयुष्मान भारत योजना, मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना, आयुष्मान आरोग्य मंदिर, मोबाइल हेल्थ सेवाओं और मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान की प्रगति की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के अंतर्गत एक लाख लोगों को उपचार का लाभ मिला है।
प्रदेश में 6 नए मेडिकल कॉलेज स्वीकृत, चिकित्सा शिक्षा का होगा विस्तार
मुख्यमंत्री साय ने चिकित्सा शिक्षा विभाग की समीक्षा करते हुए कहा कि प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों और चिकित्सा शिक्षा की सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है। इसके साथ ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पर्याप्त फैकल्टी, विशेषज्ञ चिकित्सकों और आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी है।
बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 15 शासकीय मेडिकल कॉलेज, एक एम्स और 6 निजी मेडिकल कॉलेज सहित कुल 22 चिकित्सा संस्थान हैं। इसके अतिरिक्त 6 नए मेडिकल कॉलेज स्वीकृत किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेजों की प्रगति, नए कॉलेजों की स्थापना और संचालित संस्थानों में फैकल्टी एवं विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता की समीक्षा की। उन्होंने निर्माण कार्यों और अन्य व्यवस्थाओं में आने वाली समस्याओं का समयबद्ध निराकरण करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज केवल चिकित्सा शिक्षा के संस्थान नहीं हैं, बल्कि संबंधित क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवा केंद्र भी हैं। इसलिए यहां गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ बेहतर उपचार सुविधाएं भी विकसित की जानी चाहिए।
नर्सिंग और फिजियोथेरेपी कॉलेजों की संख्या भी बढ़ी
बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश में शासकीय नर्सिंग कॉलेजों की संख्या 8 से बढ़कर 17 और फिजियोथेरेपी कॉलेजों की संख्या 1 से बढ़कर 7 हो गई है।
इसके अलावा पहली बार एलाइड हेल्थ से जुड़े 11 पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जा रहे हैं। इनके लिए 10 मेडिकल कॉलेजों में 640 सीटों की व्यवस्था की गई है। प्रदेश में पहली बार रायपुर के मेकाहारा अस्पताल में डीएम कार्डियोलॉजी की दो सीटें भी शुरू की गई हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा के विस्तार से प्रशिक्षित डॉक्टरों, नर्सिंग कर्मियों, फिजियोथेरेपिस्ट और अन्य स्वास्थ्य पेशेवरों की उपलब्धता बढ़ेगी। इसका सीधा लाभ प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा।
दवाइयों की आपूर्ति और उपकरणों के रखरखाव में लापरवाही बर्दाश्त नहीं
मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन के कार्यों की समीक्षा करते हुए दवाइयों की खरीदी, आपूर्ति, भंडारण और वितरण व्यवस्था की जानकारी ली। उन्होंने निर्देश दिए कि अस्पतालों में आवश्यक दवाइयों की कमी नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने चिकित्सा उपकरणों के रखरखाव और समय पर मरम्मत के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने तथा स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े संसाधनों के प्रबंधन में जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर दिया। आयुष एवं राष्ट्रीय आयुष मिशन के अंतर्गत संचालित संस्थाओं और उपचार सुविधाओं की भी समीक्षा की गई।
त्योहारी सीजन में मिलावटखोरों पर होगी सख्ती, खाद्य पदार्थों की जांच के निर्देश
आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए सघन जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि त्योहारों के दौरान मिठाई, दुग्ध उत्पाद और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में खाद्य पदार्थों के निर्माण, भंडारण और बिक्री स्थलों की नियमित जांच की जाए। अमानक या मिलावटी खाद्य पदार्थ पाए जाने पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि नागरिकों के स्वास्थ्य से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। खाद्य सुरक्षा से जुड़े अधिकारी पूरी सतर्कता और जिम्मेदारी के साथ काम करें।
अंतिम व्यक्ति तक बेहतर उपचार पहुंचाना सरकार का लक्ष्य
मुख्यमंत्री साय ने अधिकारियों से कहा कि स्वास्थ्य योजनाओं की वास्तविक सफलता तभी है, जब जरूरत के समय उनका लाभ प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक सहजता और समयबद्धता से पहुंचे। जिला स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाओं की नियमित समीक्षा कर कमियों की पहचान और उनका त्वरित निराकरण किया जाए।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार के साथ सेवाओं को अधिक सुलभ, संवेदनशील और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार का प्रयास है कि शहरों से लेकर सुदूर वनांचलों तक प्रत्येक नागरिक को समय पर बेहतर उपचार मिले और चिकित्सा सुविधाओं के अभाव में किसी परिवार को कठिनाई का सामना न करना पड़े।
बैठक में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया, मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद, संचालक स्वास्थ्य संजीव कुमार झा, आयुक्त चिकित्सा शिक्षा रितेश अग्रवाल, मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव प्रभात मलिक सहित स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।



