रायपुर, 12 अक्टूबर 2026
किसी बच्चे के लिए दौड़ना-भागना और साथियों के साथ खेलना सामान्य बात हो सकती है, लेकिन नौ वर्षीय लावण्या साहू के लिए यह लंबे समय से देखा जा रहा एक सपना था। जन्मजात अथवा बचपन की शारीरिक परेशानी के कारण उसके पैर उसका साथ नहीं दे पा रहे थे। ऐसे में सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित ‘निदान-03’ विशेष शिविर लावण्या और उसके परिवार के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आया।
राजिम क्षेत्र के ग्राम खर्रा निवासी लावण्या साहू के पिता हेमंत कुमार साहू और माता क्षत्रिका साहू लंबे समय से इस चिंता में थे कि उनकी बेटी अन्य बच्चों की तरह सामान्य जीवन कैसे जी सकेगी। खेल-कूद से दूर रहने वाली लावण्या के भविष्य को लेकर माता-पिता के मन में कई सवाल थे। उनके लिए बेटी का अपने पैरों पर खड़ा होना और आत्मनिर्भर बनना सबसे बड़ा सपना था।
विशेषज्ञों की जांच के बाद मिला कैलिपर
धमतरी में सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत जिला प्रशासन, समाज कल्याण विभाग एवं भगवान महावीर दिव्यांग सेवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में ‘निदान-03’ विशेष शिविर आयोजित किया गया।
शिविर में विशेषज्ञ डॉक्टरों एवं तकनीशियन टीम ने लावण्या के पैरों की बारीकी से जांच की। उसकी आवश्यकता के अनुसार पैरों का सही नाप लिया गया और त्वरित कार्रवाई करते हुए उसे मजबूत एवं आरामदायक कैलिपर उपलब्ध कराया गया।
कैलिपर पहनकर बढ़ाए नन्हे कदम, माता-पिता की आंखों में छलके खुशी के आंसू
कैलिपर लगने के बाद जब लावण्या ने धीरे-धीरे अपने नन्हे कदम आगे बढ़ाए, तो यह उसके परिवार के लिए बेहद भावुक क्षण बन गया। वर्षों से बेटी को चलने में असमर्थ देखते आए माता-पिता की आंखें खुशी के आंसुओं से छलक उठीं।
लावण्या के पिता हेमंत साहू ने जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह कैलिपर उनकी बेटी के लिए सिर्फ एक उपकरण नहीं, बल्कि जीवनभर का सहारा है। अब उन्हें विश्वास है कि लावण्या आत्मविश्वास के साथ स्कूल जाएगी, पढ़ेगी और अपने काम स्वयं कर सकेगी।
‘निदान-03’ का उद्देश्य दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाना
‘निदान-03’ शिविर का उद्देश्य दिव्यांगजनों की आवश्यकताओं की पहचान कर उन्हें आधुनिक सहायक उपकरण उपलब्ध कराना है, ताकि वे समाज की मुख्यधारा से जुड़कर सम्मानजनक एवं आत्मनिर्भर जीवन जी सकें।
लावण्या की कहानी इस बात का जीवंत उदाहरण है कि संवेदनशील शासन-प्रशासन और समाज के सहयोग से शारीरिक बाधाओं को काफी हद तक दूर किया जा सकता है। उसके नन्हे कदम अब केवल चलने की शुरुआत नहीं, बल्कि उम्मीद, आत्मविश्वास और सशक्त भविष्य की ओर बढ़ते कदम हैं।



