रायपुर, 9 अक्टूबर 2026

सेवा संकल्प अभियान के तहत शासन की तकनीक आधारित सुविधाओं का लाभ अब सीधे आम नागरिकों तक पहुंच रहा है। जांजगीर-चांपा जिले के अजीत राम साहू के लिए जमीन की रजिस्ट्री के बाद नामांतरण की प्रक्रिया आसान हो गई। रजिस्ट्री के तुरंत बाद उनका नामांतरण ऑटोम्यूटेशन के जरिए पूरा हो गया, जिससे उन्हें तहसील कार्यालय के अतिरिक्त चक्कर नहीं लगाने पड़े।

पहले जमीन की रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए अलग से तहसील कार्यालय जाना पड़ता था और प्रक्रिया पूरी होने में इंतजार करना पड़ता था। अब पंजीयन और नामांतरण की प्रक्रिया को तकनीक के माध्यम से जोड़ा गया है, जिससे नागरिकों को समय की बचत के साथ अनावश्यक कार्यालयीन दौड़भाग से राहत मिल रही है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पंजीयन सेवाओं को सरल, सुगम, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए तकनीकी सुधार किए गए हैं। पंजीयन विभाग ‘सेवा संकल्प अभियान’ के माध्यम से हितग्राहियों से सीधे संवाद कर इन सुविधाओं के जमीनी प्रभाव और उनके अनुभवों को सामने ला रहा है।

रजिस्ट्री के साथ ही पूरा हुआ नामांतरण

अजीत राम साहू ने बताया कि पहले जमीन की रजिस्ट्री कराने के बाद नामांतरण के लिए अलग से तहसील कार्यालय जाना पड़ता था। कई बार कार्यालय के चक्कर लगाने के बावजूद प्रक्रिया पूरी होने में समय लगता था। इससे खेती-किसानी और अन्य जरूरी कार्यों के लिए समय निकालना मुश्किल होता था।

इस बार ऑटोम्यूटेशन व्यवस्था के कारण रजिस्ट्री के तुरंत बाद उनका नामांतरण पूरा हो गया। उन्हें न तो अलग से तहसील कार्यालय जाना पड़ा और न ही नामांतरण के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। इससे उनका समय बचा और संपत्ति से जुड़े आगे के कार्य आसान हुए।

ऑटोम्यूटेशन से कम हुई कार्यालयों की दौड़भाग

पंजीयन विभाग की ऑटोम्यूटेशन व्यवस्था के तहत संपत्ति का पंजीयन होने के बाद नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः आगे बढ़ती है। इससे पंजीयन और राजस्व विभाग की प्रक्रियाओं के बीच समन्वय बेहतर हुआ है।

अब नागरिकों को नामांतरण के लिए अलग से आवेदन करने और संबंधित कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने की आवश्यकता कम हो रही है। इसका विशेष लाभ किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों को मिल रहा है, जिन्हें पहले जमीन के नामांतरण के लिए तहसील और राजस्व कार्यालयों में जाना पड़ता था।

आधार आधारित ई-केवाईसी से पारदर्शिता

पंजीयन सेवाओं में तकनीकी सुधार केवल ऑटोम्यूटेशन तक सीमित नहीं हैं। आधार आधारित ई-केवाईसी के माध्यम से क्रेता, विक्रेता और गवाहों की पहचान का सत्यापन किया जा रहा है। इससे पहचान सत्यापन की प्रक्रिया अधिक सुगम होने के साथ गलत पहचान के आधार पर पंजीयन की आशंका को कम करने में मदद मिल रही है।

तकनीक आधारित इन सुधारों का उद्देश्य पंजीयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक बनाना तथा नागरिकों के समय और अनावश्यक कार्यालयीन कार्यवाही को कम करना है।

अजीत राम साहू का अनुभव बना बदलाव की मिसाल

अजीत राम साहू ने रजिस्ट्री के तुरंत बाद नामांतरण होने और अतिरिक्त कार्यालयीन चक्कर से राहत मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने पंजीयन सेवाओं में किए गए सुधारों के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी के प्रति आभार जताया।

उनका अनुभव बताता है कि ऑटोम्यूटेशन केवल तकनीकी सुविधा नहीं, बल्कि समय की बचत और नागरिकों को अनावश्यक दौड़भाग से राहत देने वाली व्यवस्था बन रहा है।

‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत सामने आई अजीत राम साहू की यह कहानी पंजीयन सेवाओं में हो रहे बदलाव का उदाहरण है। तकनीक के माध्यम से रजिस्ट्री और नामांतरण के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होने से नागरिकों को संपत्ति संबंधी कार्यों में पहले की तुलना में अधिक सुविधा मिल रही है।

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