रायपुर, 09 अक्टूबर 2026
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शुक्रवार को राजधानी रायपुर स्थित निवास कार्यालय में मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप के द्वितीय बैच के 36 युवा प्रतिभागियों से आत्मीय संवाद किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने अपने छात्र जीवन, संघर्ष, पारिवारिक जिम्मेदारियों और जनसेवा से जुड़े अनुभव साझा किए। उन्होंने युवाओं को निष्ठा, ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ कार्य करने तथा अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग जनकल्याण के लिए करने का संदेश दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि युवा शक्ति ही राष्ट्र शक्ति है। विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की सक्रिय भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है। युवाओं की ऊर्जा, प्रतिभा और नवीन विचार समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाना चाहिए तथा जनकल्याण को अपने कार्य का मुख्य उद्देश्य बनाना चाहिए।
संवाद के दौरान युवा फेलो ने मुख्यमंत्री से सुशासन, शिक्षा, रोजगार, निवेश, आधुनिक तकनीक और प्रदेश के विकास में युवाओं की भूमिका से जुड़े सवाल पूछे। मुख्यमंत्री ने सहजता से सभी सवालों के जवाब दिए और युवाओं को शासन की कार्यप्रणाली समझने के साथ व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित किया।
विकसित भारत 2047 के संकल्प में युवाओं की अहम भूमिका
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया है। इसी दिशा में छत्तीसगढ़ भी विकसित प्रदेश बनने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने युवा फेलो से कहा कि वे अपनी क्षमताओं को लगातार निखारें और शासन-प्रशासन के साथ मिलकर जनहित से जुड़े विषयों पर प्रभावी समाधान प्रस्तुत करें।
उन्होंने कहा कि जिलों में कार्य करते समय स्थानीय परिस्थितियों और लोगों की वास्तविक जरूरतों को समझना जरूरी है। आंकड़ों, प्रमाणों और मैदानी अनुभव के आधार पर दिए गए सुझाव योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन और जनसेवाओं को प्रभावी बनाने में मदद कर सकते हैं।
शिक्षा और कौशल विकास से युवाओं को मिल रहे नए अवसर
मुख्यमंत्री ने अपने छात्र जीवन के अनुभव साझा करते हुए बताया कि पहले ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की सुविधाएं सीमित थीं। उन्हें अपने गांव बगिया से करीब छह किलोमीटर दूर दूसरे गांव में पांचवीं की बोर्ड परीक्षा देने जाना पड़ा था। उस समय स्कूलों के भवन कच्चे होते थे और विद्यार्थियों को बैठने के लिए घर से चटाई या जूट का बोरा लेकर जाना पड़ता था।
उन्होंने कहा कि आज छत्तीसगढ़ में आईआईएम, आईआईटी, ट्रिपल आईटी, एम्स और विधि विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थान उपलब्ध हैं। विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तक, गणवेश और मध्यान्ह भोजन जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। प्रयास आवासीय विद्यालयों के माध्यम से प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का अवसर मिल रहा है। दिल्ली स्थित ट्राइबल यूथ हॉस्टल में भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए निःशुल्क आवास और भोजन की व्यवस्था है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बदलती अर्थव्यवस्था और उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप युवाओं को तैयार करना सरकार की प्राथमिकता है। प्रदेश के लाइवलीहुड कॉलेजों के माध्यम से कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है, वहीं 30 आईटीआई का उन्नयन कर उन्हें उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप आधुनिक बनाया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि पिछले लगभग ढाई वर्षों में 700 से अधिक रोजगार मेलों के माध्यम से करीब 24 हजार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। रायपुर में आयोजित राज्य स्तरीय रोजगार मेले में 95 से अधिक नियोक्ताओं ने भाग लिया और लगभग पांच हजार युवाओं को रोजगार के अवसर मिले।
निवेश प्रस्तावों को रोजगार में बदलना सरकार का लक्ष्य
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल निवेश प्रस्ताव प्राप्त करना नहीं, बल्कि उन्हें वास्तविक परियोजनाओं और रोजगार के अवसरों में बदलना है। नई औद्योगिक नीति में स्थानीय युवाओं के रोजगार और उद्यमिता को प्राथमिकता दी गई है। महिला उद्यमियों तथा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के उद्यमियों को उद्योग स्थापित करने के लिए विशेष प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं।
अपने हालिया सिंगापुर प्रवास का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठकों में छत्तीसगढ़ की निवेश संभावनाओं को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया। प्रदेश की खनिज संपदा, वनोपज और औद्योगिक संभावनाएं विकास को नई गति दे सकती हैं। सेमीकंडक्टर और टेक्सटाइल जैसे क्षेत्रों में निवेश से युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
उन्होंने नवा रायपुर में लगभग 100 एकड़ क्षेत्र में प्रस्तावित मेडिसिटी और पांच हजार बिस्तरों वाले अस्पताल की परिकल्पना का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी परियोजनाएं स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ आर्थिक गतिविधियों और रोजगार को भी बढ़ावा देंगी।
एआई मिशन से छह लाख विद्यार्थियों को मिलेगी आधुनिक तकनीक की शिक्षा
मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य की जरूरतों को देखते हुए युवाओं को आधुनिक तकनीक में दक्ष बनाना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार ने एआई मिशन के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसके तहत छह लाख विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की शिक्षा देने और लगभग 1,500 अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने कहा कि तकनीक तेजी से दुनिया को बदल रही है। सरकार का प्रयास है कि छत्तीसगढ़ के युवा इस बदलाव में केवल सहभागी न रहें, बल्कि नेतृत्वकर्ता के रूप में आगे आएं।
मुख्यमंत्री ने साझा की संघर्ष और जनसेवा की कहानी
युवाओं के सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने बचपन के संघर्षों को याद किया। उन्होंने बताया कि करीब दस वर्ष की उम्र में पिता के आकस्मिक निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी। चार भाइयों में सबसे बड़े होने के कारण उन्हें मां, दादी और छोटे भाइयों की देखभाल के साथ खेती-बाड़ी की जिम्मेदारी भी निभानी पड़ी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने स्वयं बैलों से हल चलाने सहित खेती के कई कार्य किए। इन परिस्थितियों ने उन्हें कम उम्र में ही मेहनत, जिम्मेदारी और कठिनाइयों का सामना करना सिखाया।
उन्होंने कहा कि कभी उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी कि वे गांव के सरपंच बनेंगे। निर्विरोध सरपंच चुने जाने के बाद उन्हें विधायक, सांसद और केंद्रीय राज्यमंत्री के रूप में जनसेवा का अवसर मिला। उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन में हर जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाने का प्रयास किया।
मुख्यमंत्री ने स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव को याद करते हुए उनके धैर्य, सहजता और आत्मीय व्यवहार को अपने लिए प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि जनता के बीच रहना, लोगों के सुख-दुख में सहभागी बनना और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए उपलब्ध रहना ही उनके सार्वजनिक जीवन का आधार रहा है।
मुख्यमंत्री ने युवा फेलो से कहा कि वे अपने कार्य के केंद्र में जनकल्याण को रखें। जिम्मेदारियों को ईमानदारी से निभाने से न केवल मान-सम्मान और आत्मसंतुष्टि मिलती है, बल्कि प्रदेश, देश और समाज का भी भला होता है।
दो वर्षीय फेलोशिप में पांच माह का प्रशिक्षण और 19 माह का मैदानी अनुभव
सुशासन एवं अभिसरण विभाग के सचिव तथा मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत ने फेलोशिप कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि द्वितीय बैच में चयनित 36 युवा इंजीनियरिंग, विज्ञान, प्रबंधन, गणित, वाणिज्य और अर्थशास्त्र जैसी विविध शैक्षणिक पृष्ठभूमियों से आए हैं। इनमें कुछ प्रतिभागी अपने स्टार्टअप भी संचालित कर रहे हैं।
दो वर्षीय मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप में पांच माह का अध्ययन एवं प्रशिक्षण और 19 माह का मैदानी अनुभव शामिल है। शुरुआती तीन माह प्रतिभागी आईआईएम रायपुर में प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। इसके बाद वे जिला प्रशासन के साथ जुड़कर योजनाओं के क्रियान्वयन, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और जनसेवाओं की वास्तविक कार्यप्रणाली को समझेंगे।
राहुल भगत ने प्रतिभागियों को प्रदेश के विजन डॉक्यूमेंट ‘अंजोर छत्तीसगढ़ 2047’ का अध्ययन करने और अपने सपनों के छत्तीसगढ़ को लेकर विचार साझा करने के लिए प्रेरित किया।
14 जिलों के युवा फेलो प्रदेश के विकास में देंगे योगदान
संवाद के दौरान रायपुर की नीलिमा भारद्वाज, प्रतिभागी खुशी और जशपुर के अंशुल सहित अन्य युवाओं ने मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी जिज्ञासाएं रखीं। प्रतिभागियों ने फेलोशिप से अपनी अपेक्षाओं, शिक्षा और प्रदेश के विकास में योगदान देने की आकांक्षाओं के बारे में बताया।
मुख्यमंत्री ने युवाओं को अपने ज्ञान, कौशल और अनुभव का उपयोग जनसेवा में करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि जिलों में काम करने से उन्हें प्रशासन और योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन को समझने का महत्वपूर्ण अवसर मिलेगा।
उल्लेखनीय है कि सुशासन एवं अभिसरण विभाग द्वारा आईआईएम रायपुर और ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया के सहयोग से मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप संचालित की जा रही है। द्वितीय बैच के लिए कॉमन एडमिशन टेस्ट (CAT) स्कोर और आईआईएम की चयन प्रक्रिया के माध्यम से 36 युवाओं का चयन किया गया है। इनमें दंतेवाड़ा, बस्तर और जशपुर सहित प्रदेश के 14 जिलों के युवा शामिल हैं।
फेलो प्रशिक्षण और मैदानी अनुभव के आधार पर योजनाओं की निगरानी, नीतिगत विश्लेषण, विभागीय समन्वय तथा जनसेवाओं में सुधार के प्रयासों में सहयोग करेंगे। तीन दिवसीय प्रशिक्षण एवं अभिमुखीकरण कार्यक्रम में प्रशासनिक व्यवस्था, सुशासन की प्राथमिकताओं, लोक सेवा गारंटी, हितधारकों की पहचान और मैदानी कार्य से जुड़े विषयों पर विशेष सत्र आयोजित किए गए।
कार्यक्रम में भारतीय प्रबंध संस्थान रायपुर के निदेशक प्रोफेसर संजीव पराशर, सुशासन एवं अभिसरण विभाग के उप सचिव सूरज साहू सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।



