रायपुर, 25 सितंबर 2026
सेवा संकल्प अभियान के तहत प्रदेश के विकसित राज्य @2047 के लक्ष्य को साकार करने के लिए शिक्षा, नवाचार और युवा शक्ति को विकास का प्रमुख आधार बनाया जा रहा है। सहायक संचालक विष्णु प्रसाद वर्मा के अनुसार, किसी भी समृद्ध और सर्वसुविधायुक्त राज्य का निर्माण केवल भौतिक संसाधनों से नहीं, बल्कि युवाओं की बौद्धिक क्षमता, कार्यकुशलता और नवाचार से संभव है।
प्रदेश के विकास मॉडल के केंद्र में GYAN यानी गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी को रखा गया है। युवाओं को आर्थिक और सामाजिक उन्नति का मुख्य आधार मानते हुए उच्च शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक बदलाव किए जा रहे हैं। शिक्षा को केवल डिग्री तक सीमित न रखकर आधुनिक उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण और व्यावसायिक बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
उच्च शिक्षा में मिशन मोड पर काम
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के प्रभावी क्रियान्वयन के तहत उच्च शिक्षा विभाग मिशन मोड में काम कर रहा है। ‘उच्च शिक्षा मिशन योजना’ के प्रयासों से प्रदेश का सकल नामांकन अनुपात (GER) वर्ष 2021-22 के 19.6 प्रतिशत से बढ़कर 27.5 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इसे वर्ष 2035 तक 50 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है।
विद्यार्थियों के सर्वांगीण और समावेशी विकास के लिए प्रदेश के प्रत्येक जिले में एक सर्वसुविधायुक्त सेंटर ऑफ एक्सीलेंस महाविद्यालय स्थापित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। वहीं, शोध और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए राज्य रिसर्च एवं इनोवेशन योजना का खाका तैयार किया गया है।
शिक्षा को भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने के लिए आधुनिक वैज्ञानिक ज्ञान के साथ पारंपरिक भारतीय ज्ञान प्रणाली को भी विभिन्न विषयों के पाठ्यक्रमों में शामिल किया जा रहा है।
NAAC मूल्यांकन और शैक्षणिक संस्थानों का विस्तार
उच्च शिक्षा में गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए NAAC मूल्यांकन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। प्रदेश में पात्र 254 शासकीय महाविद्यालयों में से 200 और 9 में से 5 विश्वविद्यालयों का मूल्यांकन पूरा हो चुका है।
वर्ष 2025-26 में शैक्षणिक अवसंरचना के विस्तार के तहत 8 नए शासकीय महाविद्यालय, 5 नए निजी महाविद्यालय और 3 नए निजी विश्वविद्यालय स्थापित किए जा रहे हैं।
शिक्षकों की कमी दूर करने भर्ती प्रक्रिया शुरू
उच्च शिक्षा संस्थानों में शिक्षकों और अन्य आवश्यक स्टाफ की कमी दूर करने के लिए प्राध्यापक, सहायक प्राध्यापक, ग्रंथपाल और क्रीड़ाधिकारी के पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया शुरू की गई है।
शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार, अधोसंरचना और रोजगार से जुड़े इन प्रयासों के जरिए वर्ष 2047 के विकसित और स्वर्णिम प्रदेश की मजबूत नींव तैयार करने की दिशा में काम किया जा रहा है।



