रायपुर, 22 अगस्त 2026
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (आईजीकेवी) की बीएससी एग्रीकल्चर द्वितीय वर्ष की एंटोमोलॉजी (कीट विज्ञान) परीक्षा का प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा है कि प्रदेश में परीक्षाओं की शुचिता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता से किसी भी स्तर पर समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने या विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले तत्वों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
पांच सदस्यीय जांच समिति गठित, अज्ञात के खिलाफ FIR
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की है। वहीं, प्रकरण में तेलीबांधा थाने में अज्ञात व्यक्ति के विरुद्ध एफआईआर भी दर्ज कराई गई है।
मामले की तकनीकी जांच के लिए साइबर सेल की सहायता ली जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाएंगी कि प्रश्नपत्र सबसे पहले कहां से बाहर आया, किस माध्यम से प्रसारित हुआ और इसमें किन लोगों की भूमिका रही।
भर्ती हो या शैक्षणिक परीक्षा, गड़बड़ी पर जीरो टॉलरेंस
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों में पूरी संवेदनशीलता और दृढ़ता के साथ काम कर रही है। भर्ती परीक्षा हो या शैक्षणिक परीक्षा, उसकी निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनाए रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर अनियमितता सामने आने पर जिम्मेदारी तय की जाएगी और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा, “परीक्षाओं में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी के प्रति हमारी सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति है। विद्यार्थियों की मेहनत, उनका विश्वास और उनका भविष्य हमारे लिए सर्वोपरि है।”
उन्होंने कहा कि मामले की पूरी तह तक जाकर जांच की जाएगी और दोषी चाहे कोई भी हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा।
27 कॉलेजों के 1200 विद्यार्थी हुए थे शामिल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आईजीकेवी की बीएससी एग्रीकल्चर द्वितीय वर्ष की एंटोमोलॉजी विषय की परीक्षा 20 अगस्त को आयोजित की गई थी। प्रदेश के 27 कृषि महाविद्यालयों के लगभग 1,200 विद्यार्थी इस परीक्षा में शामिल हुए थे।
परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रसारित होने की शिकायत सामने आई थी। मामले की गंभीरता और परीक्षा की निष्पक्षता को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने परीक्षा निरस्त कर दी है।
निरस्त की गई परीक्षा अब सितंबर के प्रथम सप्ताह में दोबारा आयोजित की जाएगी।
मूल प्रश्नपत्र और वायरल पेपर का होगा मिलान
गठित जांच समिति सोशल मीडिया पर प्रसारित प्रश्नपत्र और परीक्षा में उपयोग किए गए मूल प्रश्नपत्र का मिलान करेगी। इसके साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि प्रश्नपत्र सबसे पहले किस स्रोत से बाहर आया और किन माध्यमों से आगे प्रसारित हुआ।
पुलिस और साइबर सेल डिजिटल साक्ष्यों तथा अन्य उपलब्ध तथ्यों के आधार पर मामले की जांच आगे बढ़ाएंगे।
भविष्य की परीक्षाओं के लिए सुरक्षा व्यवस्था होगी मजबूत
मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरतने और प्रकरण से जुड़े सभी तथ्यों को सामने लाने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली में विद्यार्थियों और अभिभावकों का विश्वास बनाए रखना सरकार और शैक्षणिक संस्थानों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। ऐसी किसी भी गतिविधि को गंभीरता से लिया जाएगा, जिससे मेहनत और ईमानदारी से परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों के हित प्रभावित हों।
मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय प्रशासन को भविष्य की परीक्षाओं में प्रश्नपत्रों की गोपनीयता और सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा करने के भी निर्देश दिए हैं। प्रश्नपत्र निर्माण से लेकर उसके सुरक्षित रख-रखाव, परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने और परीक्षा शुरू होने तक की पूरी प्रक्रिया में सुरक्षा उपायों को और मजबूत किया जाएगा, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।



