रायपुर,20 अगस्त 2026
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य में न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा फैसला लेते हुए PSC से चयनित 56 नए सिविल जजों की पदस्थापना के आदेश जारी कर दिए हैं। ये सभी अधिकारी लोअर ज्यूडिशियल सर्विस कैडर में परिवीक्षा अवधि पर नियुक्त किए गए हैं।
हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल राजनीश श्रीवास्तव की ओर से जारी आदेश के अनुसार, सिविल जज जूनियर डिवीजन के 56 नए न्यायिक अधिकारियों को प्रदेश के अलग-अलग जिलों में पदस्थ किया गया है। सभी नवनियुक्त जजों को 29 अगस्त 2026 तक अपने निर्धारित पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण करना होगा।
बताया गया है कि PSC ने कुछ महीने पहले सिविल जजों की चयन सूची जारी की थी। इसके बाद चयनित अभ्यर्थियों को लोअर ज्यूडिशियल सर्विस कैडर में शामिल कर आवश्यक प्रशिक्षण दिया गया और अब उनकी विभिन्न जिलों में पदस्थापना की गई है।
15 न्यायिक अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग भी
हाईकोर्ट ने नए सिविल जजों की नियुक्ति के साथ-साथ 15 न्यायिक अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग के आदेश भी जारी किए हैं। हायर ज्यूडिशियल सर्विस के पांच जजों का तबादला किया गया है।
दंतेवाड़ा परिवार न्यायालय के जज हरीश कुमार अवस्थी को रायपुर का प्रथम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश बनाया गया है। वहीं, ममता पटेल को अंबिकापुर से बिलासपुर, ज्योति अग्रवाल को पेंड्रारोड से राजनांदगांव, नमिता मिंज भास्कर को धमतरी से जगदलपुर और भूपत सिंह साहू को राजनांदगांव से दंतेवाड़ा पदस्थ किया गया है।
इसके अलावा रायपुर के प्रथम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश नीरज शर्मा को एससी-एसटी (अत्याचार निवारण) एक्ट के तहत विशेष अदालत का विशेष न्यायाधीश नियुक्त किया गया है।
अंबिकापुर में कमलेश जगदल्ला को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा स्मिता रत्नावत को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो) की जिम्मेदारी दी गई है।
7 सिविल जज जूनियर डिवीजन के भी तबादले
आदेश के तहत सिविल जज सीनियर डिवीजन और जूनियर डिवीजन संवर्ग के अधिकारियों के पदस्थापना आदेश भी जारी किए गए हैं। सतीश कुमार खाखा को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट और प्रथम सिविल जज सीनियर डिवीजन मुंगेली बनाया गया है।
वहीं, भगवान दास पनिका को प्रतापपुर, श्वेता पटेल को छुईखदान, ईशान व्यास को दुर्ग और नीलेश जगदल्ला को राजनांदगांव पदस्थ किया गया है। इसके अलावा दुर्ग के द्वितीय अतिरिक्त जज रवि कुमार कश्यप को प्रतिनियुक्ति पर हाईकोर्ट में ओएसडी बनाया गया है।
56 नए सिविल जजों की नियुक्ति और पदस्थापना से प्रदेश की अधीनस्थ अदालतों में न्यायिक कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है। न्यायिक अधिकारियों की संख्या बढ़ने से लंबित मामलों के निराकरण और सुनवाई में तेजी आने की संभावना है।



