रायपुर,18 अगस्त 2026
रायपुर नगर निगम में बढ़ी खींचतान की चर्चा
रायपुर नगर निगम में अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच कथित खींचतान अब सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गई है। 15 अगस्त के स्वतंत्रता दिवस समारोह में निगम मुख्यालय के ध्वजारोहण मंच से सभापति सूर्यकांत राठौर ने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच बढ़ते ईगो को लेकर चिंता जताई।
सभापति ने कहा कि ईगो के कारण रायपुर शहर को नुकसान हो रहा है। उन्होंने अपने 25 साल के नगर निगम कार्यकाल का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने तीन बार कांग्रेस और दो बार भाजपा के शासनकाल में पार्षद, एमआईसी सदस्य और नेता प्रतिपक्ष के रूप में काम किया, लेकिन ऐसी स्थिति पहले कभी नहीं बनी।
‘25 साल में पहली बार अराजकता की स्थिति’
सूर्यकांत राठौर ने कहा कि वर्तमान समय में संवादहीनता की स्थिति बन गई है। जनप्रतिनिधियों के खिलाफ अधिकारियों द्वारा थानों में एफआईआर दर्ज कराने की घटनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कई विवाद बातचीत के जरिए सुलझाए जा सकते थे, लेकिन मामला थाने और अदालत तक पहुंच रहा है।
उन्होंने कहा कि नगर निगम लड़ाई के लिए नहीं, जनता की सेवा के लिए है। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को आपसी मतभेद छोड़कर शहर के विकास के लिए मिलकर काम करना चाहिए।
सभापति ने कहा कि ‘ताली दोनों हाथों से बजती है’ और किसी का हाथ छोटा-बड़ा होने से फर्क नहीं पड़ता। उनके मुताबिक, ईगो रखने से सबसे पहले खुद का ही नुकसान होता है।
पुराने कर्मचारियों को याद कर भावुक हुए सभापति
सभापति ने निगम के सेवानिवृत्त अधिकारियों और कर्मचारियों का जिक्र करते हुए कहा कि पहले पुराने कर्मचारी निगम को परिवार की तरह मानते थे। अब वह जुड़ाव और अपनापन कम होता दिखाई दे रहा है।
उन्होंने कहा कि बात कहने की नहीं है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों को लेकर अब बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा है।

महापौर बोलीं- लड़ाई नहीं, समन्वय की जरूरत
महापौर मीनल चौबे ने निगम में किसी तरह की लड़ाई होने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि नगर निगम में लड़ाई की कोई स्थिति नहीं है, बल्कि जरूरत बेहतर समन्वय की है।
महापौर के मुताबिक, सभी मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों दोनों को भाषा में संयम रखना चाहिए और आपसी समन्वय के साथ काम करना चाहिए।
नेता प्रतिपक्ष ने किया सभापति के बयान का समर्थन
नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने भी सभापति के बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि सभापति ने अपने 25 साल के अनुभव के आधार पर जो बात कही है, वह सही है।
उन्होंने कहा कि ईगो सब कुछ बर्बाद कर रहा है। अधिकारी और जनप्रतिनिधि एक सिक्के के दो पहलू हैं और दोनों को मिलकर काम करने की जरूरत है। तभी शहर का विकास संभव होगा।
रायपुर नगर निगम की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
रायपुर नगर निगम प्रदेश का सबसे बड़ा निकाय है। ऐसे में यहां की कार्यप्रणाली और आपसी तालमेल का असर दूसरे नगरीय निकायों पर भी पड़ता है।
सभापति के मंच से दिए गए बयान ने अधिकारी-जनप्रतिनिधि संबंधों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। सवाल यह है कि क्या दोनों पक्षों के बीच समन्वय की कमी दूर होगी, या फिर एफआईआर और आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। शहर के विकास और जनता से जुड़े कामों के लिए इस विवाद का समाधान बेहद जरूरी माना जा रहा है।



