रायपुर, 13 अगस्त 2026
राजधानी रायपुर की शाम बुधवार को देशभक्ति के सुरों से गूंज उठी। पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में संस्कृति विभाग के सहयोग से आयोजित ‘आजादी की धुन’ समारोह में प्रदेश के विभिन्न अंचलों से आए 100 युवा कलाकारों ने अलग-अलग वाद्ययंत्रों के साथ एक साथ लाइव बैंड प्रस्तुति दी। देशभक्ति के गीतों ने समारोह में मौजूद लोगों को राष्ट्रप्रेम के भाव से सराबोर कर दिया।
समारोह में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय शामिल हुए और युवा कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि ‘आजादी की धुन’ स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग, तपस्या और बलिदान को स्मरण करने का सुनहरा अवसर है। यह आयोजन हमें इतिहास के गौरव का स्मरण कराने के साथ वर्तमान के कर्तव्यों का बोध और उज्ज्वल भविष्य के निर्माण का संकल्प दिलाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में पहली बार 100 युवा कलाकारों द्वारा एक साथ देशभक्ति की धुनों की प्रस्तुति अपने आप में अनूठा प्रयास है। उन्होंने इस अभिनव आयोजन के लिए संस्कृति विभाग और सभी कलाकारों को बधाई दी।
स्वतंत्रता आंदोलन में गीतों की रही अहम भूमिका
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि संगीत में भावनाओं को जागृत करने और लोगों को एक सूत्र में जोड़ने की अद्भुत शक्ति है। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में गीतों, कविताओं और नारों ने लोगों के भीतर स्वाधीनता की चेतना जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। देशभक्ति के गीतों ने कठिन परिस्थितियों में क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता सेनानियों का मनोबल बढ़ाया तथा देशवासियों को आजादी के लक्ष्य के लिए एकजुट किया।
उन्होंने कहा कि देश की स्वतंत्रता असंख्य बलिदानों के बाद प्राप्त हुई है। महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, सरदार वल्लभभाई पटेल, वीर सावरकर, बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर सहित असंख्य राष्ट्रनायकों और स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष ने स्वतंत्र भारत की नींव रखी।
आजादी के साथ कर्तव्यों का भी संकल्प
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता केवल अधिकारों का उत्सव नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों और दायित्वों को निभाने का संकल्प भी है। लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत बनाना और देश को निरंतर प्रगति के पथ पर आगे ले जाना सभी की साझा जिम्मेदारी है।
उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में छत्तीसगढ़ के गौरवशाली योगदान का उल्लेख करते हुए वीर नारायण सिंह और बस्तर के जननायक वीर गुण्डाधुर को याद किया। उन्होंने कहा कि इन महान सेनानियों का शौर्य और बलिदान छत्तीसगढ़ की गौरवशाली विरासत है।
युवाओं से राष्ट्र निर्माण में योगदान का आह्वान
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि ‘आजादी की धुन’ जैसे आयोजन युवा पीढ़ी को स्वतंत्रता संग्राम और उसके मूल्यों से जोड़ते हैं। नई पीढ़ी को यह जानना जरूरी है कि स्वतंत्र भारत के निर्माण के पीछे कितने ही ज्ञात-अज्ञात सेनानियों का संघर्ष और त्याग रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प देश के सामने रखा है। यह केवल सरकार का नहीं, बल्कि 140 करोड़ देशवासियों का सामूहिक संकल्प है। इसे पूरा करने में युवाओं को अपनी ऊर्जा, प्रतिभा और सामर्थ्य के साथ आगे आना होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार भी ‘विकसित भारत’ के साथ ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के संकल्प को लेकर कार्य कर रही है। उन्होंने युवाओं से ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने और विकसित भारत एवं विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
समारोह के अंत में मुख्यमंत्री श्री साय ने कलाकारों और युवाओं को हरेली पर्व की शुभकामनाएं देते हुए स्वतंत्रता दिवस की अग्रिम बधाई दी।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन, छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष श्री शशांक शर्मा, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के उपाध्यक्ष श्री अंजय शुक्ला, स्काउट-गाइड के चेयरमैन श्री इंद्रजीत सिंह खालसा सहित जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, कलाकार और बड़ी संख्या में युवा उपस्थित रहे।



