विशेष लेख

धनंजय राठौर
संयुक्त संचालक, जनसंपर्क

रायपुर, 5 अगस्त 2026

विश्व स्तनपान सप्ताह के अवसर पर नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य और पोषण के लिए मां के दूध के महत्व पर विशेष जोर दिया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार जन्म के पहले घंटे के भीतर स्तनपान शुरू करना और पहले छह महीने तक केवल मां का दूध देना शिशु के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।

मां का पहला दूध है प्राकृतिक सुरक्षा कवच

जन्म के तुरंत बाद आने वाला गााढ़ा पीला दूध (कोलस्ट्रम) नवजात शिशु का पहला प्राकृतिक टीका माना जाता है। इसमें मौजूद एंटीबॉडी, प्रोटीन और विटामिन शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाते हैं और उसे कई प्रकार के संक्रमणों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

स्तनपान से कम होता है गंभीर बीमारियों का खतरा

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और यूनिसेफ (UNICEF) के अनुसार स्तनपान करने वाले बच्चों में दस्त, निमोनिया, कान के संक्रमण और श्वसन संबंधी बीमारियों का खतरा काफी कम हो जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इष्टतम स्तनपान हर वर्ष दुनिया भर में लाखों नवजात शिशुओं की जान बचाने की क्षमता रखता है।

पहले छह महीने केवल मां का दूध

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि जन्म से छह महीने तक शिशु को केवल मां का दूध ही दिया जाए। इस दौरान बच्चे को पानी, शहद या ऊपर का दूध देने की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि मां के दूध में सभी आवश्यक पोषक तत्व और पर्याप्त पानी मौजूद होता है। छह महीने बाद पूरक पौष्टिक आहार शुरू करते हुए स्तनपान दो वर्ष या उससे अधिक समय तक जारी रखा जा सकता है।

मां और बच्चे दोनों के लिए लाभकारी

स्तनपान केवल शिशु ही नहीं, बल्कि मां के स्वास्थ्य के लिए भी बेहद लाभकारी है। इससे स्तन कैंसर और अंडाशय के कैंसर का जोखिम कम होता है, प्रसव के बाद शरीर के सामान्य होने में मदद मिलती है और मां-बच्चे के बीच भावनात्मक संबंध अधिक मजबूत होता है।

परिवार और समाज की भी है जिम्मेदारी

विशेषज्ञों का कहना है कि स्तनपान केवल मां की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि परिवार और समाज की साझा जिम्मेदारी है। कामकाजी महिलाओं के लिए क्रेच सुविधा, मातृत्व अवकाश, स्तनपान अवकाश और सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छ फीडिंग रूम जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराना आवश्यक है, ताकि माताएं बिना किसी बाधा के अपने शिशु को स्तनपान करा सकें।

स्वस्थ समाज की मजबूत नींव

विश्व स्तनपान सप्ताह का उद्देश्य समाज में जागरूकता बढ़ाना और ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहां हर मां अपने बच्चे को बिना किसी संकोच और बाधा के स्तनपान करा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि मां का दूध ही स्वस्थ, कुपोषण-मुक्त और सशक्त पीढ़ी की सबसे मजबूत नींव है।

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