रायपुर,25 अगस्त 2026

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने मंत्रालय में वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक लेकर विभाग की महत्वपूर्ण योजनाओं और परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में प्रधानमंत्री ई-बस योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0, स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के तहत प्रस्तावित वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजना तथा 15वें वित्त आयोग के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों पर चर्चा की गई।

प्रमुख सचिव ने योजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन, वित्तीय व्यवहार्यता, जनसुविधा और दीर्घकालिक स्थिरता को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से नियमित मॉनिटरिंग करते हुए निर्धारित लक्ष्यों को तय समय-सीमा में पूरा करने को कहा। बैठक में सूडा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुमित अग्रवाल भी उपस्थित थे।

ई-बसों के लिए जनसुविधा आधारित रूट प्लान बनाने के निर्देश

प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने प्रधानमंत्री ई-बस योजना के तहत रायपुर में ई-बसों के संचालन को अधिक व्यवस्थित और जनोपयोगी बनाने के लिए व्यापक रूट प्लान तैयार करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि ई-बसों के रूट तय करते समय शहर के प्रमुख दर्शनीय स्थल, स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों को शामिल किया जाए, ताकि शहर के विभिन्न हिस्सों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी स्थापित हो सके और अधिक से अधिक नागरिक सार्वजनिक परिवहन का लाभ उठा सकें।

उन्होंने प्रस्तावित रूटों की व्यवहारिकता, यात्री आवागमन और कनेक्टिविटी का आकलन करने के लिए विस्तृत सर्वे कराने के निर्देश दिए। साथ ही पीपीपी मॉडल के आधार पर बस स्टॉप्स की सूची तैयार करने और यात्रियों की सुविधा के अनुसार उनके स्थान निर्धारित करने को कहा।

यात्रियों की सुविधा के अनुसार तय होगा किराया

बैठक में ई-बस यात्रियों के लिए युक्तिसंगत और सुविधाजनक किराया निर्धारित करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश भी दिए गए। प्रमुख सचिव ने कहा कि आम नागरिकों की भुगतान क्षमता को ध्यान में रखते हुए किराया संरचना तैयार की जाए।

उन्होंने योजना को आधुनिक और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए नई तकनीकों के प्रभावी उपयोग पर जोर दिया। बस रूट, बस स्टॉप, बसों की उपलब्धता और यात्री सुविधाओं से संबंधित व्यवस्थाओं को तकनीक आधारित बनाकर सुगम, सुरक्षित और बेहतर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए।

30 सितम्बर तक पूर्ण करने होंगे निर्माणाधीन आवास

प्रमुख सचिव ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 के तहत निर्माणाधीन आवासों को मिशन अवधि की अंतिम निर्धारित तिथि 30 सितम्बर 2026 तक पूरा करने के निर्देश दिए।

उन्होंने नगरीय निकायों में शेष और निर्माणाधीन आवासों की संख्या के आधार पर साप्ताहिक लक्ष्य तय कर विशेष अभियान चलाने तथा आवास निर्माण को मिशन मोड में पूरा करने को कहा। प्रत्येक नगरीय निकाय स्तर पर आवासों की प्रगति की नियमित समीक्षा करने और धीमी गति वाले निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए गए।

प्रमुख सचिव ने जिला कलेक्टरों को भी शेष आवासों को पूरा कराने के लिए स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने और उनकी सतत समीक्षा सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने जिला प्रशासन और नगरीय निकायों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर देते हुए लंबित कार्यों की तकनीकी और प्रशासनिक समस्याओं का समयबद्ध निराकरण करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि हितग्राहियों के आवास निर्माण की वास्तविक प्रगति के आधार पर योजना के प्रावधानों के अनुसार किस्त की राशि का समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए, ताकि निर्माण कार्य में किसी तरह की रुकावट न आए।

वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजनाओं के लिए व्यवहारिक वित्तीय मॉडल पर जोर

बैठक में स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के तहत प्रस्तावित वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजनाओं के लिए चिन्हित क्लस्टरों, उनकी तकनीकी व्यवहार्यता और वित्तीय पक्षों की समीक्षा की गई।

प्रमुख सचिव ने कहा कि ठोस अपशिष्ट के वैज्ञानिक और प्रभावी प्रबंधन के लिए वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजनाएं महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, इनके सफल संचालन के लिए तकनीकी व्यवहार्यता के साथ-साथ दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता का स्पष्ट आकलन जरूरी है।

उन्होंने राज्य सरकार और नगरीय निकायों पर पड़ने वाले संभावित वित्तीय दायित्व का समग्र आकलन करने तथा भविष्य के संचालन और अन्य आवश्यकताओं के लिए जरूरी वित्तीय संसाधनों का यथार्थपरक अनुमान तैयार करने के निर्देश दिए।

पीपीपी मॉडल में निजी भागीदारी का होगा आकलन

बैठक में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत निजी क्षेत्र की संभावित भागीदारी पर भी विस्तार से चर्चा की गई। प्रमुख सचिव ने सक्षम और अनुभवी निजी भागीदारों की उपलब्धता, निवेश के प्रति उनकी रुचि और अपेक्षाओं का विस्तृत आकलन करने को कहा।

उन्होंने राज्य सरकार, नगरीय निकायों और निजी क्षेत्र के बीच उत्तरदायित्वों और वित्तीय सहभागिता का संतुलित निर्धारण सुनिश्चित करने पर जोर दिया, ताकि परियोजनाएं व्यावहारिक और लंबे समय तक टिकाऊ बनी रहें।

15वें वित्त आयोग के कार्यों की बेहतर प्लानिंग के निर्देश

प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने अधिकारियों को 15वें वित्त आयोग से प्राप्त राशि का उपयोग समुचित और दीर्घकालिक योजनाओं के आधार पर करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि नगरीय निकायों में उपलब्ध संसाधनों और स्थानीय आवश्यकताओं का आकलन कर प्राथमिकता के आधार पर विकास कार्यों की योजना तैयार की जाए, जिससे सीमित संसाधनों का अधिकतम और प्रभावी उपयोग हो सके।

उन्होंने विशेष रूप से सड़कों की समग्र प्लानिंग पर जोर देते हुए कहा कि सड़क निर्माण और उन्नयन के कार्यों को बिखरे हुए तरीके से करने के बजाय शहर की भविष्य की आवश्यकताओं और समग्र अधोसंरचना को ध्यान में रखकर योजनाबद्ध तरीके से किया जाना चाहिए।

गैप एनालिसिस से होगी सैचुरेशन आधारित शहरी विकास की योजना

बैठक में नगरीय निकायों में सैचुरेशन आधारित विकास पर भी चर्चा की गई। प्रमुख सचिव ने प्रत्येक क्षेत्र में उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं का आकलन कर गैप एनालिसिस तैयार करने के निर्देश दिए।

इसके माध्यम से सड़क, नाली, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और अन्य आवश्यक शहरी अधोसंरचना से जुड़ी कमियों की पहचान कर प्राथमिकता के आधार पर कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

प्रमुख सचिव ने कहा कि गैप एनालिसिस के आधार पर विकास कार्यों का चयन होने से योजनाएं अधिक लक्षित, प्रभावी और परिणामोन्मुख बनेंगी तथा नागरिकों को बेहतर शहरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।

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