रायपुर, 5 जुलाई

छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और पंडवानी गायन की विश्वविख्यात हस्ती, पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का रविवार तड़के निधन हो गया। वह 72 वर्ष की थीं और लंबे समय से अस्वस्थ चल रही थीं। उन्होंने रविवार सुबह लगभग 3:15 बजे रायपुर एम्स में अंतिम सांस ली।

डॉ. तीजन बाई ने अपनी अनूठी गायन शैली, प्रभावशाली अभिनय और दमदार प्रस्तुति से पंडवानी कला को देश-दुनिया में नई पहचान दिलाई। महाभारत की कथाओं को जीवंत अंदाज में प्रस्तुत कर उन्होंने भारतीय लोककला को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया। उनकी प्रस्तुतियों ने एशिया, यूरोप, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों के दर्शकों को प्रभावित किया।

भारतीय लोककला में उनके अतुलनीय योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 1988 में पद्मश्री, 2003 में पद्म भूषण और 2019 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया। इसके अलावा उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए। कई विश्वविद्यालयों ने उन्हें मानद डी.लिट. की उपाधि भी प्रदान की थी।

डॉ. तीजन बाई का निधन छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत और भारतीय लोककला जगत के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। उन्होंने पंडवानी को गांव की चौपाल से निकालकर वैश्विक मंच तक पहुंचाया और अपनी कला के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को विश्वभर में स्थापित किया। उनके निधन से कला जगत में शोक की लहर है।

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