नई दिल्ली,8 अगस्त 2026

NEET-UG परीक्षा के पैटर्न में बड़े बदलाव की चर्चा के बीच केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल किया है। सरकार ने बताया कि NEET परीक्षा को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए गठित हाई-पावर्ड टास्क फोर्स इस पूरी प्रक्रिया का मूल्यांकन कर रही है।

फिलहाल NEET को पेन-एंड-पेपर मोड से कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) में बदलने या JEE की तर्ज पर इसे एक अथवा दो चरणों में आयोजित करने को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली टास्क फोर्स करेगी सिफारिश

शिक्षा मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा है कि सरकार नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली हाई-पावर्ड टास्क फोर्स की सिफारिशों का इंतजार कर रही है। रिपोर्ट मिलने के बाद परीक्षा के नए पैटर्न पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।

टास्क फोर्स परीक्षा की तकनीकी क्षमता, सुरक्षा, निष्पक्षता, बुनियादी ढांचे और छात्रों पर पड़ने वाले प्रभाव समेत कई पहलुओं का मूल्यांकन कर रही है।

CBT से पेपर लीक पर लग सकती है रोक

सरकार के संभावित विकल्पों में कंप्यूटर आधारित परीक्षा को प्रमुख माना जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक CBT लागू होने से प्रश्नपत्रों की सुरक्षा बेहतर हो सकती है और पेपर लीक जैसी घटनाओं की आशंका कम की जा सकती है।

हालांकि, इसके साथ चुनौतियां भी हैं। खासकर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों के कई विद्यार्थियों को कंप्यूटर आधारित परीक्षा का पर्याप्त अनुभव नहीं है। ऐसे में बिना तैयारी के CBT लागू करने से छात्रों के बीच असमानता बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

मॉक टेस्ट और डिजिटल ट्रेनिंग की जरूरत

विशेषज्ञों का सुझाव है कि CBT लागू करने से पहले बड़े स्तर पर मॉक टेस्ट, पायलट प्रोजेक्ट और डिजिटल ट्रेनिंग कराई जानी चाहिए। इससे छात्रों को नए परीक्षा पैटर्न के लिए तैयार होने का पर्याप्त समय मिलेगा।

22 लाख से ज्यादा छात्रों के लिए बड़ी चुनौती

देश में हर साल करीब 22 से 23 लाख अभ्यर्थी NEET परीक्षा में शामिल होते हैं। इतने बड़े स्तर पर परीक्षा को ऑनलाइन कराने के लिए देशभर में पर्याप्त कंप्यूटर लैब, स्थिर इंटरनेट कनेक्टिविटी और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराना बड़ी प्रशासनिक चुनौती होगी।

यदि NEET को JEE की तरह दो चरणों में आयोजित करने का फैसला लिया जाता है, तो परीक्षा व्यवस्था में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय हाई-पावर्ड टास्क फोर्स की रिपोर्ट और सभी पहलुओं के मूल्यांकन के बाद ही लिया जाएगा।

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