नई दिल्ली, 20 जून 2026

भारत और रूस मिलकर ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल के नए और अत्याधुनिक संस्करण विकसित कर रहे हैं। इसमें छोटे, हल्के और हाइपरसोनिक ब्रह्मोस वेरिएंट शामिल हैं, जो भारतीय सशस्त्र बलों की मल्टी-डोमेन स्ट्राइक क्षमता को नई मजबूती देंगे।

भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने इस परियोजना की पुष्टि करते हुए बताया कि दोनों देश 800 किलोमीटर रेंज वाले ब्रह्मोस संस्करण, पनडुब्बी से लॉन्च होने वाले वेरिएंट, विमान आधारित हल्के संस्करण और हाइपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइल पर काम कर रहे हैं।

वर्तमान में ब्रह्मोस मिसाइल का वजन करीब 3 टन है और यह मैक 2.8 की गति से उड़ान भरती है। वहीं, विकसित की जा रही ब्रह्मोस-NG (नेक्स्ट जेनरेशन) का वजन लगभग 1.2 टन होगा और इसकी गति मैक 5 तक पहुंच सकती है। यह मिसाइल LCA तेजस और Su-30MKI जैसे लड़ाकू विमानों पर भी तैनात की जा सकेगी।

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, हल्के आकार और कम वजन के कारण एक Su-30MKI विमान एक साथ कई ब्रह्मोस-NG मिसाइलें ले जा सकेगा, जिससे उसकी मारक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इसके अलावा जमीनी और नौसैनिक प्लेटफॉर्म पर भी अधिक संख्या में मिसाइलें तैनात की जा सकेंगी।

ब्रह्मोस एयरोस्पेस के प्रमुख जयतीर्थ जोशी ने बताया कि भविष्य में लंबी दूरी और कम लागत वाले संस्करणों पर भी काम किया जा रहा है। नई तकनीक और कंपोजिट सामग्री के उपयोग से मिसाइल की लागत में लगभग 20 प्रतिशत तक कमी आने की संभावना है। साथ ही इसमें स्वदेशी पुर्जों और वॉरहेड का इस्तेमाल भी बढ़ाया जाएगा।

रक्षा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि ब्रह्मोस के नए वेरिएंट भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना की ताकत को कई गुना बढ़ाने के साथ क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन में भी अहम भूमिका निभाएंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Posts