रायपुर, 27 अगस्त 2026

छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) तैयार करने की दिशा में प्रक्रिया तेज हो गई है। इसी क्रम में राजधानी रायपुर स्थित न्यू सर्किट हाउस में धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों, विभिन्न आयोग, निगम और मंडल के पदाधिकारियों के साथ विस्तृत बैठक आयोजित की गई। बैठक में समान नागरिक संहिता को लेकर विभिन्न वर्गों से सुझाव और राय आमंत्रित किए गए।

समान नागरिक संहिता के लिए गठित समिति के सदस्य सेवानिवृत्त आईएएस श्री शत्रुघ्न सिंह और श्री एम.के. राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता श्री मोहन पवार, सेवानिवृत्त श्रीमती ज्योति रानी सिंह तथा सदस्य सचिव श्री श्याम धावड़े के समक्ष विभिन्न संगठनों और प्रतिनिधियों ने अपने विचार रखे।

विवाह, तलाक और उत्तराधिकार में समान अधिकार

संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों को साकार करने के उद्देश्य से गठित समिति प्रदेशभर में लोगों से सुझाव ले रही है। प्रस्तावित समान नागरिक संहिता का उद्देश्य धर्म, जाति और पंथ से परे सभी नागरिकों के लिए पारिवारिक मामलों में समान कानूनी व्यवस्था विकसित करना है।

इसमें विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, गोद लेने और लिव-इन संबंधों जैसे व्यक्तिगत मामलों को शामिल किया जा रहा है। उत्तराधिकार के मामले में पुत्र और पुत्री को समान अधिकार देने तथा महिलाओं को वैवाहिक और संपत्ति संबंधी मामलों में बराबरी का अधिकार देने पर भी जोर दिया गया है। साथ ही असमानता पैदा करने वाले प्रावधानों और कुछ धार्मिक कुप्रथाओं को समाप्त करने की दिशा में सुझाव सामने आए।

विभिन्न संगठनों और आयोगों की सहभागिता

बैठक में मध्य क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष श्री प्रणव कुमार मरपच्ची, विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष श्री ललित माखीजा, क्रिश्चियन समाज के श्री जान राजेश पॉल, मुस्लिम समाज के अध्यक्ष श्री सलाम रिजवी, गुरुद्वारा कमेटी के अध्यक्ष श्री इंद्रजीत छाबड़ा, अन्य पिछड़ा वर्ग प्राधिकरण के उपाध्यक्ष श्री ललित चंद्राकर और राज्य नीति आयोग के अध्यक्ष श्री गणेश शंकर मिश्रा सहित कई प्रतिनिधि शामिल हुए।

इसके अलावा राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष श्री संदीप शर्मा, महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू, सदस्य श्रीमती सरला कोसरिया और श्रीमती दीपिका सोरी, गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष श्री विशेषर पटेल, राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष श्री अमरजीत छाबड़ा, राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष श्री संजय श्रीवास्तव, अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष श्री रूप सिंह मंडावी, मछुआ कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष श्री लखन लाल धीवर तथा जैतू साव मठ के महंत श्री राम सुंदर दास ने भी सहभागिता की।

अग्रवाल समाज, माहेश्वरी समाज सहित कई सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी समिति के समक्ष अपने बहुमूल्य सुझाव साझा किए।

एक समान विधिक ढांचे की दिशा में कदम

बैठक में सभी नागरिकों को समान और न्यायसंगत अधिकार देने के लिए एक समान विधिक ढांचा तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। प्रस्तावित संहिता में सर्वसमावेशी समानता को प्रमुख आधार बनाया गया है।

विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों के कारण उत्पन्न होने वाली जटिलताओं और भ्रम को दूर कर स्पष्ट एवं सुव्यवस्थित कानूनी व्यवस्था विकसित करने की दिशा में सुझाव दिए गए। साथ ही महिलाओं को उत्तराधिकार और वैवाहिक अधिकारों में बराबरी देने तथा भेदभावपूर्ण प्रावधानों को समाप्त करने पर भी चर्चा हुई।

जनजातीय परंपराओं का संरक्षण

छत्तीसगढ़ की विशिष्ट जनजातीय और रूढ़िगत परंपराओं को लेकर भी समिति संवेदनशीलता के साथ आगे बढ़ रही है। प्रस्तावित सुधारों का इन परंपराओं पर पड़ने वाले व्यावहारिक प्रभावों का आकलन किया जाएगा।

समिति द्वारा प्रदेशव्यापी जन-संवाद, फील्ड स्टडी और ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आम नागरिकों, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों, कानूनविदों तथा विभिन्न वर्गों से राय और सुझाव जुटाए जा रहे हैं।

न्यू सर्किट हाउस में आयोजित इस विस्तृत परिचर्चा से छत्तीसगढ़ में पारदर्शी, सर्वसमावेशी और जनहितैषी समान नागरिक संहिता तैयार करने की प्रक्रिया को और मजबूती मिली है।

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