जगदलपुर, 15 जुलाई। विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा के बाद बस्तर के दूसरे सबसे बड़े धार्मिक आयोजन गोंचा महापर्व की शुरुआत बुधवार, 15 जुलाई से हो गई। 360 आरण्यक ब्राह्मण समाज द्वारा आयोजित इस ऐतिहासिक पर्व की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। 15 जुलाई से 25 जुलाई तक चलने वाले इस दस दिवसीय महापर्व का शुभारंभ नेत्रोत्सव के साथ हुआ। इस दौरान भगवान जगन्नाथ, माता सुभद्रा और भगवान बलभद्र की विशेष पूजा-अर्चना के साथ धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला शुरू हो गया।
360 आरण्यक ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष वेद प्रकाश पांडे ने बताया कि नेत्रोत्सव के बाद अगले दस दिनों तक विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। आदिवासी कारीगरों द्वारा तैयार किए गए नए भव्य रथों में भगवान जगन्नाथ, माता सुभद्रा और बलभद्र को विराजमान कर पारंपरिक रथयात्रा निकाली जाएगी। रथयात्रा के दौरान बस्तर के ग्रामीण बांस से बनी पारंपरिक ‘तुपकी’ से भगवान जगन्नाथ को सलामी देंगे। यह अनूठी परंपरा केवल बस्तर के गोंचा महापर्व में ही देखने को मिलती है।
उन्होंने बताया कि गोंचा महापर्व को विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा के बाद क्षेत्र का दूसरा सबसे बड़ा धार्मिक उत्सव माना जाता है। करीब 600 वर्षों से चली आ रही इस परंपरा के तहत जगन्नाथ पुरी की तर्ज पर भगवान जगन्नाथ, माता सुभद्रा और बलभद्र के तीन विशाल रथ पूरे शहर का भ्रमण करते हैं। इस ऐतिहासिक रथयात्रा को देखने हर वर्ष हजारों श्रद्धालु और पर्यटक जगदलपुर पहुंचते हैं।
इतिहासकार एवं जानकार हेमंत पांडे के अनुसार, लगभग 600 वर्ष पहले बस्तर के राजा महाराज पुरुषोत्तम देव पैदल यात्रा कर ओडिशा के पुरी पहुंचे थे। वहां के गजपति महाराज ने उन्हें भगवान जगन्नाथ मंदिर में स्थापित माता सुभद्रा का रथ भेंट किया था। उसी ऐतिहासिक घटना के बाद बस्तर में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा और गोंचा महापर्व की शुरुआत हुई, जो आज भी पूरी श्रद्धा और भव्यता के साथ मनाया जाता है।
गोंचा पर्व समिति ने इस वर्ष 15 से 25 जुलाई तक चलने वाले इस महापर्व में शामिल होने के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को भी आमंत्रित किया है। समिति का कहना है कि मुख्यमंत्री ने आयोजन में शामिल होने की सहमति दी है। ऐसे में इस बार का गोंचा महापर्व पहले से अधिक भव्य और आकर्षक होने की उम्मीद है।




