गरियाबंद,30 अक्टूबर 2026
बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवाती तूफान अर्नब ने धान खरीदी से पहले किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। जिन खेतों में किसानों ने दिन-रात मेहनत कर फसल तैयार की थी, वे अब मौसम की मार झेल रहे हैं। चक्रवात के असर से देवभोग क्षेत्र में हजारों एकड़ फसल खराब होने के कगार पर पहुंच गई है। बताया जा रहा है कि सिनापाली, बाड़ीगांव, गिरशुल और झाखरपारा क्षेत्र के 20 से अधिक गांवों में पकी हुई धान की फसल पानी से भरे खेतों में बिछ गई है।
फसल बचाने के लिए संघर्ष कर रहे किसान
घुटने भर पानी में खड़े किसानों की तस्वीर उनकी परेशानी बयां करने के लिए काफी है। पानी से भरे खेतों में किसान एक-एक पौधे को संभालने में जुटे हैं। वे कई पौधों को एक साथ बांधकर फसल बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
यह तस्वीर देवभोग तहसील के सिनापाली गांव की है, जहां किसान कपड़े की रस्सी से धान के पौधों को खड़ा कर रहे हैं, ताकि खेतों में भरे पानी से धान की बालियां सड़ने से बचाई जा सकें।
किसान दुर्बल राम, खिरसिंधु और हरिराम ने बताया कि दूध भरे धान की फसल को सबसे ज्यादा खतरा है। यदि फसल तीन दिन से ज्यादा पानी में डूबी रही तो धान खराब हो सकता है। वहीं, पकी हुई धान की फसल के पौधे भी सड़ने लगेंगे।
नुकसान से बचाने के लिए धान की बालियों को उठाकर खड़ा रखना किसानों के सामने बड़ी चुनौती बन गया है। इसके बावजूद किसान अपनी मेहनत की फसल बचाने की हरसंभव कोशिश कर रहे हैं।
सब्जी और दलहन की फसलों को भी नुकसान
चक्रवात अर्नब ने केवल धान की फसल को ही नहीं, बल्कि मक्का, सब्जी और दलहन की फसलों को भी नुकसान पहुंचाया है। तूफान के चलते कच्चे मकानों को भी क्षति पहुंची है और जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
बाजार बंद होने से सब्जी उत्पादकों के सामने भी असमंजस की स्थिति बन गई है। खेतों और बाड़ियों में पानी भरने से फसलों को नुकसान का खतरा है, वहीं घर लाने के बाद भी सब्जियों की बिक्री नहीं हो पा रही है।
पिछले दो दिनों में सब्जियों का रंग भी फीका पड़ने लगा है। ऐसे में मजबूरी में किसान अपने घरों के सामने ही दुकान लगाकर सब्जियां बेच रहे हैं, ताकि कम से कम उनकी लागत निकल सके।
खाद और बीज पर लगाया गया पैसा डूबने की चिंता के बीच अब किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बची हुई फसल को सुरक्षित रखना है।
नुकसान के आकलन के लिए होगा सर्वे
देवभोग तहसीलदार सुशील कुमार भोई ने बताया कि तूफान से काफी नुकसान हुआ है। किसानों को हुए नुकसान का आकलन करने के लिए सर्वे कराया जाएगा।
उन्होंने बताया कि 33 प्रतिशत तक नुकसान होने पर आरबीसी 6-4 के तहत क्षतिपूर्ति का प्रावधान है। प्रभावित किसानों से विधिवत आवेदन लेकर निर्धारित प्रक्रिया के तहत सहायता प्रदान की जाती है।
अब किसानों को सर्वे और प्रशासनिक सहायता का इंतजार है, ताकि मौसम की मार से हुए नुकसान की भरपाई हो सके।



