रायपुर, 28 अक्टूबर 2026

छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए समर्थन मूल्य पर धान खरीदी 15 नवंबर 2026 से शुरू होगी। राज्य सरकार इस वर्ष 27.50 लाख से अधिक किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदेगी। किसानों से प्रति एकड़ अधिकतम 21 क्विंटल धान की खरीदी की जाएगी। खरीदी प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए प्रदेश में 360 नए उपार्जन केंद्र शुरू किए जा रहे हैं, जिससे अब कुल 3100 केंद्रों पर धान खरीदी होगी।

राज्य सरकार ने किसानों को उनकी उपज बेचने में किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए व्यापक तैयारियां की हैं। खरीदी व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के साथ ही किसानों को डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया है। ‘तुंहर टोकन’ मोबाइल एप के माध्यम से किसान घर बैठे ऑनलाइन टोकन प्राप्त कर सकेंगे। वहीं, धान के अवैध परिवहन, पुनर्चक्रण और खरीदी में अनियमितताओं को रोकने के लिए निगरानी व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है।

3100 उपार्जन केंद्रों पर होगी धान खरीदी

किसानों को धान बेचने के लिए बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इस वर्ष 360 नए धान उपार्जन केंद्र प्रारंभ किए जा रहे हैं। इसके बाद प्रदेश में कुल 3100 उपार्जन केंद्रों के माध्यम से खरीदी की जाएगी। सभी केंद्रों पर किसानों की सुविधा के अनुसार आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

धान खरीदी के लिए नए और पुराने जूट बारदानों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने को भी कहा गया है। वास्तविक किसानों से ही धान खरीदी सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन व्यवस्था लागू रहेगी। इससे खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने और अनियमितताओं पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।

भारत सरकार के खाद्य विभाग ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए छत्तीसगढ़ से केंद्रीय पूल में 73 लाख मीट्रिक टन चावल का लक्ष्य निर्धारित किया है।

एग्रीस्टैक आईडी वाले किसानों को दोबारा पंजीयन की जरूरत नहीं

राज्य सरकार ने किसानों की सुविधा के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए एग्रीस्टैक आईडी वाले पिछले वर्ष के सभी पंजीकृत किसानों को धान विक्रय के लिए मान्य किया है। ऐसे किसानों को धान बेचने के लिए अलग से पंजीयन कराने की आवश्यकता नहीं होगी।

एग्रीस्टैक में पंजीयन होने के कारण किसानों को समिति में अलग से ऋण पुस्तिका प्रस्तुत करने की भी आवश्यकता नहीं होगी। वहीं, डिजिटल क्रॉप सर्वे के माध्यम से धान के रकबे का ऑनलाइन निर्धारण सुनिश्चित किया गया है। इससे पंजीयन और खरीदी प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बनाने में मदद मिलेगी।

‘तुंहर टोकन’ एप से 24 घंटे मिलेगा ऑनलाइन टोकन

धान खरीदी के दौरान समितियों में लगने वाली लंबी कतारों से किसानों को राहत देने के लिए खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग द्वारा ‘तुंहर टोकन’ मोबाइल एप का उपयोग किया जाएगा। यह एप गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है। इसके माध्यम से किसान 24 घंटे ऑनलाइन टोकन प्राप्त कर सकेंगे।

एप पर किसान सबसे पहले ओटीपी आधारित पंजीयन कर सकेंगे। प्रत्येक समिति की निर्धारित दैनिक खरीदी सीमा में से 70 प्रतिशत टोकन मोबाइल एप के माध्यम से जारी किए जाएंगे, जबकि शेष 30 प्रतिशत टोकन समिति स्तर पर जारी होंगे।

ऑनलाइन माध्यम से जारी होने वाले 70 प्रतिशत टोकन में 80 प्रतिशत हिस्सेदारी लघु एवं सीमांत किसानों के लिए और 20 प्रतिशत बड़े किसानों के लिए निर्धारित की गई है।

किसानों को रकबे के अनुसार मिलेंगे टोकन

राज्य सरकार द्वारा किसानों के रकबे के अनुसार टोकन की व्यवस्था निर्धारित की गई है।

  • दो एकड़ तक के किसान: एक टोकन।
  • दो एकड़ से अधिक और 10 एकड़ तक के किसान: दो टोकन।
  • 10 एकड़ से अधिक रकबे वाले किसान: तीन टोकन।

इस व्यवस्था से किसानों को अपनी उपज बेचने की योजना बनाने में सुविधा मिलेगी और टोकन प्राप्त करने के लिए समितियों में बार-बार जाने की आवश्यकता कम होगी।

अवैध धान परिवहन पर रोक के लिए 273 चेक पोस्ट चिन्हांकित

प्रदेश में धान के अवैध परिवहन, पुनर्चक्रण और खरीदी में होने वाली अनियमितताओं को रोकने के लिए निगरानी तंत्र को मजबूत किया जा रहा है। इसके तहत ‘इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर’ का विस्तार किया जाएगा। इस केंद्र के माध्यम से धान खरीदी से जुड़ी गतिविधियों की प्रभावी निगरानी की जाएगी।

सीमावर्ती राज्यों से छत्तीसगढ़ के खरीदी केंद्रों में अवैध रूप से धान की आवक रोकने के लिए जिला स्तर पर विशेष जांच दल गठित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए प्रदेश में 273 चेक पोस्ट और 131 सीमावर्ती उपार्जन केंद्र चिन्हांकित किए गए हैं।

कमांड एंड कंट्रोल सेंटर में प्राप्त शिकायतों के निराकरण के लिए समय-सीमा भी तय की गई है।

  • अति संवेदनशील केंद्रों की शिकायतें: 24 घंटे के भीतर।
  • संवेदनशील केंद्रों की शिकायतें: 48 घंटे के भीतर।
  • सामान्य केंद्रों की शिकायतें: 72 घंटे के भीतर।

इस व्यवस्था का उद्देश्य खरीदी प्रक्रिया पर लगातार निगरानी रखना और शिकायतों का समय पर निराकरण सुनिश्चित करना है।

क्यूआर कोड और लोकेशन ट्रैकिंग से होगी निगरानी

धान खरीदी व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में चावल की प्रत्येक बोरी पर क्यूआर कोड आधारित स्कैनिंग और ट्रेसिबिलिटी सुनिश्चित की जाएगी। इससे बारदानों के परिवहन की निगरानी करने और चावल के पुनर्चक्रण पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में मदद मिलेगी।

इसके अलावा, धान परिवहन के लिए लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस युक्त वाहनों का उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे परिवहन के दौरान वाहनों की वास्तविक समय में निगरानी की जा सकेगी और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने में सहायता मिलेगी।

किसान-केंद्रित और पारदर्शी व्यवस्था पर जोर

राज्य सरकार ने इस वर्ष धान खरीदी की पूरी व्यवस्था को किसान-केंद्रित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने पर जोर दिया है। नए उपार्जन केंद्रों, ऑनलाइन टोकन, बायोमेट्रिक सत्यापन, डिजिटल क्रॉप सर्वे और आधुनिक निगरानी प्रणालियों के माध्यम से किसानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की तैयारी की गई है।

15 नवंबर से शुरू होने वाली धान खरीदी में 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर, प्रति एकड़ अधिकतम 21 क्विंटल की खरीदी और घर बैठे ऑनलाइन टोकन की सुविधा किसानों के लिए प्रमुख व्यवस्थाएं होंगी। साथ ही, अवैध धान की आवक और पुनर्चक्रण पर रोक लगाने के लिए चेक पोस्ट, विशेष जांच दल और तकनीकी निगरानी तंत्र की मदद ली जाएगी।

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