नई दिल्ली, 23 अगस्त 2026

भारत का स्पेस सेक्टर अब केवल रॉकेट लॉन्च और सैटेलाइट तक सीमित नहीं रह गया है। भारतीय स्पेस स्टार्टअप्स अंतरिक्ष में फ्यूल-स्टेशन, दवाइयां बनाने, स्पेस रोबोट और सैटेलाइट रिफ्यूलिंग जैसी भविष्य की तकनीकों पर काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 अगस्त को देश के 20 स्पेस स्टार्टअप्स के फाउंडर्स से बातचीत की, जिसका वीडियो 23 अगस्त को जारी किया गया।

प्रधानमंत्री मोदी ने स्टार्टअप्स को भरोसा दिलाया कि सरकार जोखिम लेने वाले उद्यमियों का लगातार समर्थन करती रहेगी। इस दौरान स्टार्टअप्स ने अंतरिक्ष क्षेत्र में अपनी मौजूदा उपलब्धियों और आने वाले वर्षों की योजनाओं का रोडमैप साझा किया।

हर महीने रॉकेट लॉन्च करने की तैयारी

स्पेस स्टार्टअप स्काईरूट एयरोस्पेस ने बताया कि 18 जुलाई को उसके निजी रॉकेट के जरिए सैटेलाइट्स को सफलतापूर्वक ऑर्बिट में पहुंचाया गया। कंपनी ने तीन फैक्ट्रियां तैयार की हैं, जिनकी क्षमता हर महीने एक रॉकेट बनाने की है।

अब कंपनी का लक्ष्य हर महीने एक रॉकेट लॉन्च करने का है। इसके बाद लॉन्च की संख्या को बढ़ाकर हर सप्ताह और फिर एक दिन में कई लॉन्च तक ले जाने की योजना है।

अंतरिक्ष में बनेगा ‘पेट्रोल पंप’

भारतीय स्टार्टअप्स ऑर्बिटल डॉकिंग और इन-स्पेस रिफ्यूलिंग तकनीक पर भी काम कर रहे हैं। इसका उद्देश्य ऐसे सिस्टम तैयार करना है, जिनकी मदद से अंतरिक्ष में सैटेलाइट्स से जुड़कर उनमें दोबारा ईंधन भरा जा सके।

इस तकनीक से सैटेलाइट्स की ऑपरेशनल लाइफ बढ़ाने और अंतरिक्ष मिशनों की लागत कम करने में मदद मिल सकती है। भविष्य में इसे अंतरिक्ष में बनने वाले ‘पेट्रोल पंप’ की तरह देखा जा रहा है।

स्पेस रोबोट हटाएंगे डेड सैटेलाइट्स

भारतीय कंपनियां अंतरिक्ष में मौजूद निष्क्रिय या ‘डेड’ सैटेलाइट्स को हटाने के लिए रोबोटिक स्पेसक्राफ्ट विकसित करने पर भी काम कर रही हैं। यह तकनीक बढ़ते स्पेस डेब्रिस की समस्या से निपटने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

रोबोटिक सिस्टम की मदद से निष्क्रिय सैटेलाइट्स को ऑर्बिट से हटाने की दिशा में काम किया जा रहा है, जिससे अंतरिक्ष में सक्रिय मिशनों की सुरक्षा बेहतर हो सकती है।

जीरो ग्रेविटी में बनेंगी दवाइयां

स्पेस फार्मा के क्षेत्र में भी भारतीय स्टार्टअप्स नई संभावनाएं तलाश रहे हैं। कंपनियां माइक्रोग्रैविटी में दवाइयों और प्रोटीन के निर्माण पर काम कर रही हैं।

अंतरिक्ष में कम गुरुत्वाकर्षण के कारण कुछ पदार्थों को अधिक नियंत्रित तरीके से तैयार किया जा सकता है। इससे भविष्य में नई दवाइयों और मेडिकल रिसर्च के क्षेत्र में महत्वपूर्ण संभावनाएं पैदा हो सकती हैं।

विदेशी बाजारों पर भारतीय कंपनियों की नजर

भारतीय स्पेस स्टार्टअप्स को विदेशी बाजारों से भी अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के एक महीने में भारतीय कंपनियों को 8 नए लॉन्च कॉन्ट्रैक्ट मिले हैं।

अमेरिका और यूरोप में काम कर रहे भारतीय इंजीनियर्स का भारत लौटना भी देश के स्पेस सेक्टर के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। इससे घरेलू कंपनियों को अनुभवी वैश्विक प्रतिभा का लाभ मिल सकता है।

सैटेलाइट डेटा से 10 लाख किसानों को फायदा

भारतीय स्टार्टअप्स सैटेलाइट डेटा के जरिए करीब 10 लाख किसानों तक मौसम, मिट्टी की नमी और फसल स्वास्थ्य से जुड़ी सटीक जानकारी पहुंचाने की तैयारी कर रहे हैं।

सैटेलाइट से मिलने वाले डेटा के इस्तेमाल से किसानों को फसल की निगरानी, मौसम की जानकारी और मिट्टी की स्थिति समझने में मदद मिल सकती है। इससे खेती को अधिक डेटा आधारित और लाभकारी बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

रॉकेट से आगे बढ़ रहा भारत का स्पेस सेक्टर

भारत का स्पेस सेक्टर अब केवल रॉकेट लॉन्च तक सीमित नहीं है। स्पेस रिफ्यूलिंग, स्पेस डेब्रिस हटाने, स्पेस फार्मा, रोबोटिक्स, सैटेलाइट डेटा और ग्लोबल लॉन्च सर्विसेज जैसे क्षेत्रों में भारतीय स्टार्टअप्स तेजी से नई संभावनाएं तैयार कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी के साथ हुई बैठक में सामने आया रोडमैप यह संकेत देता है कि आने वाले वर्षों में भारतीय निजी कंपनियां अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में बड़ी भूमिका निभाने की तैयारी कर रही हैं।

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