विशेष लेख

छगन लाल लोन्हारे
संयुक्त संचालक, जनसंपर्क, छत्तीसगढ़ शासन

रायपुर, 23 अगस्त 2026

सुशासन तिहार छत्तीसगढ़ शासन की एक संवेदनशील पहल है, जिसका उद्देश्य गांवों और शहरों के द्वार तक पहुंचकर आम जनता की समस्याओं का समयबद्ध समाधान करना और शासन-प्रशासन के प्रति जनविश्वास को मजबूत करना है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में आयोजित इस अभियान के माध्यम से जनता से सीधे संवाद के साथ विकास कार्यों को गति दी गई।

बस्तर का आयतु हो या सरगुजा जिले का तिहारू, धमतरी जिले के आदिवासी बहुल नगरी अंचल के ईतवारी राम कमार जैसे ग्रामीण भी प्रदेश के मुखिया के सामने सहजता से अपनी बात रख सकते हैं। वे सीधे पूछ सकते हैं कि उनके गांव में पीडीएस यानी उचित मूल्य की दुकान से अनाज और अन्य खाद्य सामग्री सही समय पर और किफायती दर पर मिल रही है या नहीं।

यही सुशासन का वास्तविक अर्थ है। गुड गवर्नेंस यानी ऐसा शासन जो लोक-केंद्रित, पारदर्शी और जवाबदेह हो तथा जिसमें जनता की आवाज सर्वोपरि हो।

समाज के अंतिम व्यक्ति तक प्रशासन की सहज पहुंच

सुशासन तिहार के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने ग्रामीणों के बीच पहुंचकर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति का जायजा लिया। सुशासन केवल योजनाओं की घोषणा करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक सहजता से पहुंचे।

गांवों की चौपालों में ग्रामीणों ने अपनी जरूरतों और समस्याओं को खुलकर सामने रखा। इनमें हैंडपंप, तालाब में घाट निर्माण, सामुदायिक भवन, आंगनबाड़ी भवन, पहुंच मार्ग, विद्युत लाइन का विस्तार, मध्यान्ह भोजन और स्कूलों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति जैसी मांगें शामिल रहीं।

गांव, गरीब और किसानों की समस्याओं का त्वरित समाधान

सुशासन तिहार के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में 15 से 20 ग्राम पंचायतों के समूह तथा शहरी क्षेत्रों में वार्ड क्लस्टर स्तर पर शिविर आयोजित किए गए।

ग्रामीणों के बीच मुख्यमंत्री का अचानक पहुंचना लोगों के लिए कौतूहल और आत्मीयता का विषय रहा। तपती बैशाख-जेठ की दोपहरी में प्रदेश के मुखिया को अपने बीच पाकर ग्रामीणों ने सहजता से अपनी समस्याएं और जरूरतें बताईं। मुख्यमंत्री ने भी कई सार्वजनिक जरूरतों को मौके पर ही मंजूरी प्रदान की।

01 मई से 10 जून 2026 तक पूरे प्रदेश में संचालित सुशासन तिहार का उद्देश्य गांव, गरीब और किसानों की समस्याओं का यथासंभव त्वरित समाधान करना रहा।

चौपाल में ग्रामीणों से सीधा संवाद

छत्तीसगढ़ में सरकार और जनता के बीच सीधे संवाद का प्रभावी माध्यम बनकर सुशासन तिहार सामने आया। अभियान के तहत प्रदेश के सभी 33 जिलों के 146 विकासखंडों में शासकीय अधिकारियों-कर्मचारियों के अभियान दल गठित किए गए।

राज्य की 11 हजार 693 ग्राम पंचायतों के अंतर्गत लगभग 19 हजार 820 गांवों तक अभियान को पहुंचाने का प्रयास किया गया। विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी गांवों में पहुंचे और कई स्थानों पर रात में रुककर चौपाल के माध्यम से ग्रामीणों की समस्याएं और जरूरतें जानीं।

सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों का मूल्यांकन

अभियान में त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। मुख्यमंत्री के साथ सभी जिलों के प्रभारी मंत्रियों और प्रभारी सचिवों ने विभिन्न जिलों के गांवों का आकस्मिक दौरा कर अभियान के संचालन और शासकीय योजनाओं की स्थिति का जायजा लिया।

इस दौरान सार्वजनिक वितरण प्रणाली, अंत्योदय अन्न योजना, अनाज भंडारण और वितरण की स्थिति की समीक्षा की गई। मानसून से पहले भौगोलिक रूप से पहुंचविहीन क्षेत्रों में आवश्यक वस्तुओं के समुचित भंडारण तथा बीपीएल श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिए अमृत नमक वितरण की स्थिति भी देखी गई।

मजदूरी भुगतान और राजस्व प्रकरणों की समीक्षा

सुशासन तिहार के दौरान महात्मा गांधी नरेगा और अन्य रोजगारमूलक कार्यों की प्रगति तथा श्रमिकों के मजदूरी भुगतान की स्थिति की समीक्षा की गई।

इसके अलावा नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन जैसे राजस्व प्रकरणों के निराकरण की स्थिति भी देखी गई। ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था, पेयजल स्रोतों की साफ-सफाई, स्वच्छता अभियान और निर्मल ग्राम योजना की प्रगति का भी जायजा लिया गया।

बिजली, कृषि और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी फोकस

अभियान के दौरान विद्युत व्यवस्था, ट्रांसफार्मरों और विद्युत लाइनों के रख-रखाव, कृषि पंपों के विद्युतीकरण तथा एकल बत्ती कनेक्शन से संबंधित कार्यों की समीक्षा की गई।

इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं, पेंशन, निराश्रित पेंशन और सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों की स्थिति भी देखी गई।

इस तरह सुशासन तिहार ने शासन को केवल कार्यालयों तक सीमित रखने के बजाय जनता के बीच पहुंचाने का प्रयास किया। गांव की चौपाल में जब तिहारू जैसे ग्रामीण सीधे अपनी बात प्रदेश के मुखिया तक पहुंचाते हैं, तो यही तस्वीर जनविश्वास, जनकल्याण और विकास आधारित सुशासन की नई पहचान बनती है।

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