जगदलपुर | 21 जुलाई 2026
बस्तर की युवा पीढ़ी अब पारंपरिक सोच से आगे बढ़कर आधुनिक कृषि और पशुपालन के जरिए आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही है। विकासखंड बकावंड के किंजोली गांव की रहने वाली बीएससी एग्रीकल्चर ग्रेजुएट ग्रेसी दुग्गा ने सरकारी सहायता और अपनी दूरदर्शिता के दम पर 1 करोड़ 12 लाख 10 हजार रुपये की लागत से आधुनिक सूकरपालन परियोजना स्थापित कर पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है।
ग्रेसी ने वर्ष 2023 में उत्तराखंड के देहरादून से बीएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के बाद उन्होंने नौकरी या उच्च शिक्षा की बजाय स्वरोजगार का रास्ता चुना। उन्होंने देखा कि बस्तर में सूकर मांस की मांग काफी अधिक है, लेकिन अधिकांश लोग केवल घरेलू स्तर पर ही सूकरपालन करते हैं। इसी अवसर को पहचानते हुए उन्होंने इसे व्यावसायिक रूप देने का निर्णय लिया।
बड़े स्तर पर परियोजना शुरू करने के लिए ग्रेसी ने पशु चिकित्सा विभाग के मार्गदर्शन में विस्तृत परियोजना तैयार की। नेशनल लाइव स्टॉक मिशन योजना के तहत उनके प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली और अनुसूचित जनजाति वर्ग की पहली आवेदक होने के कारण उन्हें 30 लाख रुपये की सब्सिडी प्राप्त हुई। ग्रेसी का कहना है कि यदि यह सरकारी अनुदान नहीं मिलता तो वह केवल 20 से 25 सूकरों के साथ छोटे स्तर पर ही शुरुआत कर पातीं।
मई 2025 में उनके फार्म की शुरुआत 100 मादा और 10 नर सहित कुल 110 प्रजनन योग्य सूकरों से हुई। तमिलनाडु से लाई गई उन्नत नस्ल के सूकरों की देखरेख पशुपालन विभाग के चिकित्सकों और विशेषज्ञों की निगरानी में की गई। आधुनिक प्रबंधन और वैज्ञानिक पद्धति का परिणाम यह रहा कि जून 2026 तक फार्म में 202 वयस्क प्रजनन सूकर और 206 पिगलेट्स तैयार हो चुके हैं। वर्तमान में फार्म में 400 से अधिक सूकर मौजूद हैं।
ग्रेसी के फार्म से अब उन्नत नस्ल के पिगलेट्स की बिक्री भी शुरू हो चुकी है। रायपुर सहित स्थानीय बाजारों में उनकी नियमित आपूर्ति हो रही है। हाल ही में उन्होंने 65 पिगलेट्स 6 हजार रुपये प्रति पिगलेट की दर से बेचकर 3 लाख 90 हजार रुपये की आय अर्जित की है।
पशु चिकित्सा विभाग के सहयोग, शासन की आर्थिक सहायता और ग्रेसी दुग्गा की मेहनत ने इस परियोजना को बस्तर में आधुनिक पशुपालन का सफल मॉडल बना दिया है। आज उनकी सफलता न केवल उन्हें आत्मनिर्भर बना रही है, बल्कि क्षेत्र के अन्य शिक्षित युवाओं को भी नौकरी की तलाश छोड़कर कृषि और पशुपालन आधारित स्टार्टअप शुरू करने की प्रेरणा दे रही है।




