जगदलपुर, 29 सितंबर 2026। बाढ़ की आपदा से प्रभावित लोगों को जहां राहत और सुरक्षित ठिकाना उपलब्ध कराया जा रहा है, वहीं उनके मानसिक स्वास्थ्य का भी ध्यान रखा जा रहा है। जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (डीएमएचपी) बस्तर की टीम ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सभागार, टाउन हॉल, जगदलपुर में ठहरे बाढ़ पीड़ितों से बातचीत कर उन्हें मानसिक स्वास्थ्य काउंसलिंग और मनोसामाजिक सहयोग प्रदान किया।
राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के जिला नोडल अधिकारी डॉ. ऋषभ साव के निर्देश और डॉ. रुखसार खान के मार्गदर्शन में डीएमएचपी टीम ने राहत शिविर में रह रहे लोगों से व्यक्तिगत संवाद किया। इस दौरान लोगों की चिंताओं, तनाव, भय और घर-परिवार से जुड़ी भावनात्मक परेशानियों को संवेदनशीलता के साथ सुना गया।
परेशानियों को सुना, मानसिक रूप से मजबूत रहने की दी सलाह
काउंसलिंग के दौरान बाढ़ प्रभावित लोगों को कठिन परिस्थितियों में खुद को मानसिक रूप से संतुलित रखने और परिवार तथा समाज से मिलने वाले सहयोग का उपयोग करने की सलाह दी गई। साथ ही जरूरत महसूस होने पर मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं से संपर्क करने की जानकारी भी दी गई।
टीम ने बताया कि किसी आपदा के बाद तनाव, चिंता या भावनात्मक परेशानी महसूस होना स्वाभाविक हो सकता है। ऐसे समय में प्रभावित व्यक्ति को अपनी परेशानी अकेले नहीं झेलनी चाहिए, बल्कि परिवार, परिचितों और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों से सहयोग लेना चाहिए।
डीएमएचपी टीम ने दिया भावनात्मक सहयोग
काउंसलिंग के दौरान कुमारी मोनिका और आकाश मिंज, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट; रूपेश मसीह, कम्युनिटी नर्स; मीनाक्षी चंद्राकर, साइकियाट्रिक सोशल वर्कर तथा ममता नेताम, सोशल वर्कर मौजूद रहे। टीम ने बाढ़ पीड़ितों की बात सुनी और उनकी जरूरत के अनुसार मानसिक एवं मनोसामाजिक सहयोग प्रदान किया।
डीएमएचपी टीम ने कहा कि आपदा के समय राहत, भोजन और सुरक्षित स्थान के साथ मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल भी जरूरी है। प्रभावित लोगों को सम्मान के साथ सुनना और उन्हें भावनात्मक सहारा देना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।




