जगदलपुर, 29 सितंबर 2026। बस्तर जिले की ग्राम पंचायतों में स्थानीय जरूरतों और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर विकास कार्यों की योजना तैयार की जाएगी। विकसित भारत–रोजगार एवं आजीविका मिशन के लिए गारंटी (वीबी-जी-राम-जी) के तहत विकसित ग्राम पंचायत प्लान बनाने के लिए सोमवार को जिला पंचायत बस्तर के सभाकक्ष में एक दिवसीय जिला स्तरीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला आयोजित की गई।

कार्यशाला में सभी जनपद पंचायतों के कार्यक्रम अधिकारी, कार्यपालन अभियंता, अनुविभागीय अधिकारी, तकनीकी समन्वयक, सहायक प्रोग्रामर, तकनीकी सहायक और बेयरफुट टेक्नीशियन शामिल हुए। नागरिक समाज संगठनों तथा विभिन्न विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी भाग लिया।

प्रशिक्षण के दौरान जिला पंचायत के सहायक परियोजना अधिकारी, प्रोग्रामर और तकनीकी सहायकों ने ग्राम पंचायत स्तर पर योजना बनाने की प्रक्रिया समझाई। उन्होंने मैदानी अमले को बताया कि गांव की जरूरतों को कैसे दर्ज किया जाएगा, उपलब्ध संसाधनों का आकलन किस तरह होगा और योजना तैयार करने में ऑनलाइन प्रणालियों का उपयोग कैसे किया जाएगा।

2 अक्टूबर से 15 जनवरी तक चलेगी योजना निर्माण की प्रक्रिया

अधिकारियों के अनुसार, विकसित ग्राम पंचायत प्लान तैयार करने की शुरुआत 2 अक्टूबर को होने वाली पहली विशेष ग्राम सभा से होगी। इसके बाद ग्राम सभाओं और विभागीय समन्वय के माध्यम से चरणबद्ध तरीके से कार्ययोजना बनाई जाएगी। इस प्रक्रिया को 15 जनवरी 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

योजना निर्माण में युक्तधारा पोर्टल के उन्नत संस्करण और जीआईएस मैपिंग का उपयोग किया जाएगा। भू-स्थानिक आंकड़ों के अध्ययन से यह पहचानने में मदद मिलेगी कि किन क्षेत्रों में विकास कार्यों की अधिक जरूरत है। इसके आधार पर ग्राम पंचायतों की प्राथमिकताएं तय की जाएंगी।

कार्ययोजना में जल सुरक्षा, ग्रामीण बुनियादी सुविधाएं, आजीविका बढ़ाने वाले काम और जलवायु के अनुकूल विकास जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इन कार्यों को अंतिम रूप देने के लिए संबंधित विभागों के बीच तालमेल स्थापित करने पर भी जोर दिया गया।

कार्यशाला में अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिए गए कि वे निर्धारित समय-सीमा के भीतर ग्राम सभाओं के माध्यम से ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित करें। जिला स्तरीय प्रशिक्षण का उद्देश्य ऐसी विकास योजना तैयार करना है, जिसमें गांव के लोगों की जरूरतें, स्थानीय संसाधन और उपलब्ध आंकड़े—तीनों को आधार बनाया जाए।

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