रायपुर, 21 अगस्त 2026
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय वर्ल्ड लीडर्स फोरम में छत्तीसगढ़ की बदलती आर्थिक तस्वीर, निवेश की संभावनाओं और भविष्य के विकास का रोडमैप वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ अब पारंपरिक औद्योगिक और खनिज आधारित अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर युवा शक्ति, नवाचार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्टार्टअप, ग्रीन एनर्जी और आधुनिक विनिर्माण आधारित नई अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल बड़े निवेश आकर्षित करना नहीं, बल्कि निवेश को रोजगार, उद्यमिता, बेहतर आय और युवाओं के उज्ज्वल भविष्य से जोड़ना है। प्रदेश के युवा केवल नौकरी तलाशने वाले ‘जॉब सीकर’ न रहें, बल्कि अपने नवाचार और उद्यमिता से दूसरों के लिए रोजगार पैदा करने वाले ‘जॉब क्रिएटर’ बनें, इसी सोच के साथ नीतियों और योजनाओं को नया स्वरूप दिया जा रहा है।
फोरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर और ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन सहित भारत और विश्व की कई प्रमुख हस्तियां शामिल हुईं।
6.31 लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था, 11.57 प्रतिशत विकास दर
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था का आकार लगभग 6.31 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जबकि आर्थिक वृद्धि दर 11.57 प्रतिशत रही। प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय बढ़कर 1 लाख 79 हजार 244 रुपये हो गई है।
वर्ष 2026-27 के 1.72 लाख करोड़ रुपये के बजट में अधोसंरचना निर्माण, पूंजीगत व्यय और सामाजिक कल्याण को प्राथमिकता दी गई है। सड़क, रेल, ऊर्जा, डिजिटल कनेक्टिविटी और औद्योगिक अधोसंरचना को मजबूत कर प्रदेश को देश के प्रमुख निवेश गंतव्यों में स्थापित करने पर जोर दिया जा रहा है।
नई औद्योगिक नीति के बाद 8 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव
मुख्यमंत्री ने कहा कि नई औद्योगिक विकास नीति 2024-30, वन क्लिक सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस सुधारों से निवेश प्रक्रियाओं को सरल और समयबद्ध बनाया गया है।
पिछले दो वर्षों में 450 से अधिक प्रक्रियाओं का सरलीकरण किया गया है। नई औद्योगिक नीति लागू होने के बाद प्रदेश को 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।
अब स्टील, सीमेंट और खनिज आधारित उद्योगों के साथ सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, एआई, डेटा सेंटर, फार्मास्यूटिकल, टेक्सटाइल, लॉजिस्टिक्स, ग्रीन एनर्जी और फूड प्रोसेसिंग जैसे भविष्य के क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएं विकसित की जा रही हैं।
2030 तक 5 हजार स्टार्टअप का लक्ष्य
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश की नई अर्थव्यवस्था के केंद्र में युवा हैं। सरकार का लक्ष्य है कि युवा केवल नौकरी की प्रतीक्षा न करें, बल्कि रोजगार सृजक बनें।
छत्तीसगढ़ में वर्ष 2030 तक 5 हजार स्टार्टअप विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। नए उद्यमियों को अपने विचारों को व्यवसाय में बदलने के लिए 10 लाख रुपये तक सीड फंड सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। युवाओं को तकनीक, नवाचार, कौशल और बाजार से जोड़कर मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम तैयार किया जा रहा है।
6 लाख विद्यार्थियों को एआई प्रशिक्षण
मुख्यमंत्री ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को छत्तीसगढ़ के भविष्य के विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। प्रदेश में 6 लाख विद्यार्थियों और 1.5 लाख शासकीय कर्मचारियों को एआई प्रशिक्षण देने की योजना है।
इसके साथ नागरिकों को बेहतर और तेज सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए 50 से अधिक एआई आधारित सरकारी सेवाएं विकसित की जाएंगी।
उन्होंने कहा कि एआई का उद्देश्य केवल तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना, भविष्य के रोजगार और उद्यमिता के अवसर तैयार करना तथा सरकारी सेवाओं को अधिक प्रभावी और नागरिक-केंद्रित बनाना है।
500 करोड़ का एआई मिशन, नवा रायपुर में डेटा सेंटर पार्क
छत्तीसगढ़ में 500 करोड़ रुपये के राज्य एआई मिशन पर काम किया जा रहा है। इसके तहत 100 एआई डेटा लैब और 5 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे। साथ ही 300 से अधिक एआई स्टार्टअप्स को सहयोग देने का लक्ष्य है।
नवा रायपुर में करीब 1,000 करोड़ रुपये की लागत से एआई डेटा सेंटर पार्क विकसित किया जा रहा है। इससे प्रदेश के डिजिटल और एआई इकोसिस्टम को मजबूती मिलने के साथ युवाओं के लिए नई पीढ़ी के रोजगार के अवसर तैयार होंगे।
बस्तर में विकास, निवेश और रोजगार के नए अवसर
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा का महत्वपूर्ण अध्याय है। सुरक्षा की स्थिति में सुधार के बाद अब बस्तर में विकास, निवेश, रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर तैयार हो रहे हैं।
बस्तर सहित प्रदेश के करीब 10 लाख परिवारों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से 4,824 करोड़ रुपये की आजीविका उन्नयन योजना तैयार की जा रही है। बस्तर में 421 बंद स्कूलों को पुनः शुरू किया गया है और तकनीक आधारित स्वास्थ्य सेवाओं के तहत 34 लाख से अधिक लोगों की डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल तैयार की गई है।
3,513 करोड़ रुपये की जगदलपुर-रावघाट रेल परियोजना को बस्तर के आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया गया। इससे औद्योगिक और व्यापारिक कनेक्टिविटी बढ़ने तथा स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
पर्यटन और स्थानीय उत्पाद बनेंगे रोजगार का आधार
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। चित्रकोट, तीरथगढ़, कांगेर घाटी और सिरपुर जैसे पर्यटन स्थलों को वैश्विक पर्यटन मानचित्र से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है।
राज्य में पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिए जाने से निजी निवेश के साथ होटल, हॉस्पिटैलिटी, परिवहन, हस्तशिल्प और अन्य सेवाओं में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
वहीं लघु वनोपज, औषधीय पौधों, मिलेट और कृषि उत्पादों की स्थानीय प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि स्थानीय लोगों को उनके उत्पादों का अधिकतम आर्थिक लाभ मिल सके।
ग्रीन एनर्जी बनेगी विकास का नया आधार
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ ऊर्जा उत्पादन में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है और अब ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
आने वाले वर्षों में करीब 4 हजार मेगावाट अतिरिक्त सौर ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य है। प्रदेश के 90 हजार से अधिक घर सौर ऊर्जा से जुड़ चुके हैं। भिलाई में प्रदेश का पहला फ्लोटिंग सोलर प्लांट भी स्थापित किया गया है।
ग्रीन एनर्जी के विस्तार से ऊर्जा जरूरतों की पूर्ति के साथ नए निवेश और ग्रीन जॉब्स के अवसर भी बढ़ेंगे।
कच्चे माल के बजाय वैल्यू एडिशन पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की नई आर्थिक नीति का लक्ष्य केवल प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करना नहीं, बल्कि प्रदेश के भीतर ही उनका अधिकतम वैल्यू एडिशन करना है।
नवा रायपुर और राजनांदगांव में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी अधोसंरचना विकसित की जा रही है। राजनांदगांव में प्रस्तावित स्पेस मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर, 142 एकड़ का फार्मा पार्क तथा टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट पार्क औद्योगिक विकास को नई गति देंगे।
कोरबा में लिथियम की खोज से बैटरी निर्माण, ऊर्जा भंडारण और न्यू एनर्जी सेक्टर में नई संभावनाएं बनने की उम्मीद है।
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस से निवेश प्रक्रिया होगी आसान
मुख्यमंत्री ने बताया कि उद्योगों के लिए प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के उद्देश्य से ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम-2026 लागू किया गया है।
कम जोखिम वाले उद्योगों के मामलों में निर्धारित समय में निर्णय नहीं होने पर स्वतः अनुमति का प्रावधान किया गया है। इसके अंतर्गत 8 विभागों की 43 सेवाओं को शामिल किया गया है, जिससे प्रदेश के लगभग 15 लाख एमएसएमई को लाभ मिलने की संभावना है।
संसाधन से नवाचार तक छत्तीसगढ़ का निवेश मॉडल
मुख्यमंत्री साय ने वैश्विक निवेशकों के समक्ष छत्तीसगढ़ को ऐसे राज्य के रूप में प्रस्तुत किया, जहां प्राकृतिक संसाधन, ऊर्जा, भूमि, युवा मानव संसाधन, बेहतर कनेक्टिविटी, आधुनिक अधोसंरचना और निवेश-अनुकूल नीतियां उपलब्ध हैं।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा अब संसाधन आधारित अर्थव्यवस्था से ज्ञान, तकनीक, नवाचार और उद्यमिता आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रही है। निवेश इस बदलाव का माध्यम है, जबकि अंतिम उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को बेहतर रोजगार, उद्यमिता और आय के अवसर उपलब्ध कराना है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सलाहकार आर. कृष्णा दास, प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, सचिव पी. दयानंद एवं राहुल भगत, विशेष सचिव एवं जनसम्पर्क आयुक्त रजत बंसल, आवासीय आयुक्त श्रुति सिंह सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।



