वॉशिंगटन/तेहरान, 15 जून 2026
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बाद ऐतिहासिक शांति समझौते का रास्ता साफ हो गया है। दोनों देशों के बीच 14 प्रमुख शर्तों पर सहमति बनी है। इस समझौते के तहत होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने, ईरान पर लगे प्रतिबंधों में राहत देने और क्षेत्रीय संघर्ष समाप्त करने जैसे अहम फैसले शामिल हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा करते हुए कहा कि 19 जून 2026 को जेनेवा में समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर किए जाएंगे। वहीं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सबसे पहले युद्धविराम समझौते की जानकारी साझा की थी।
मेहर न्यूज एजेंसी के मुताबिक, अमेरिका और उसके सहयोगी देश ईरान के पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर की सहायता योजनाएं तैयार करेंगे। इसके अलावा विदेशों में फंसे 24 अरब डॉलर के ईरानी फंड भी जारी किए जाएंगे।
19 जून को होंगे हस्ताक्षर
समझौते पर 19 जून को जेनेवा में हस्ताक्षर होंगे। ईरान की ओर से मोहम्मद बाकिर गालिबाफ और अब्बास अराघची, जबकि अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शामिल होंगे। ट्रंप के भी समारोह में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
अमेरिका-ईरान शांति समझौते की 14 प्रमुख शर्तें
- ईरान के तेल और पेट्रोकेमिकल निर्यात पर लगी पाबंदियां हटाई जाएंगी।
- ईरान को अपने वित्तीय संसाधनों तक पूर्ण पहुंच मिलेगी।
- फ्रीज किए गए 24 अरब डॉलर के ईरानी फंड जारी किए जाएंगे।
- अमेरिका और सहयोगी देश ईरान के पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर की योजनाएं पेश करेंगे।
- लेबनान सहित सभी मोर्चों पर युद्ध और सैन्य अभियान समाप्त होंगे।
- अमेरिका ईरान की संप्रभुता का सम्मान करेगा और आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगा।
- ईरान पर लगाई गई अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी 30 दिनों के भीतर हटाई जाएगी।
- अमेरिकी सेनाएं ईरान के आसपास के संवेदनशील इलाकों से हटेंगी।
- होर्मुज स्ट्रेट को 30 दिनों के भीतर दोबारा खोला जाएगा।
- परमाणु मुद्दों और प्रतिबंधों पर अंतिम समझौते के लिए 60 दिनों की वार्ता चलेगी।
- ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराएगा।
- अमेरिका बातचीत के दौरान नई पाबंदियां नहीं लगाएगा और सैन्य गतिविधियां नहीं बढ़ाएगा।
- समझौते के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए विशेष तंत्र बनाया जाएगा तथा अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी मिलेगी।
- ईरान का मिसाइल कार्यक्रम और प्रतिरोधी समूहों को समर्थन इस समझौते का हिस्सा नहीं होगा।
होर्मुज स्ट्रेट खुलने से वैश्विक असर
समझौते के तहत होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने का फैसला वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल व्यापार इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है। इसके खुलने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद जताई जा रही है।


