रायपुर, 5 जुलाई 2026
सुशासन एवं अभिसरण विभाग तथा भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) रायपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय ‘चिंतन शिविर 3.0’ का रविवार को सफलतापूर्वक समापन हुआ। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यह शिविर केवल विचार-विमर्श का मंच नहीं, बल्कि सुशासन और विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा तय करने वाला प्रभावी माध्यम बन चुका है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार आधुनिक, पारदर्शी, तकनीक-संचालित और नागरिक-केंद्रित प्रशासन विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास जताया कि शिविर से प्राप्त सुझावों को जल्द ही नीतिगत और प्रशासनिक सुधारों के रूप में लागू किया जाएगा।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि पिछले दो चिंतन शिविरों से मिले सुझावों के आधार पर ई-ऑफिस, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 और सेवा सेतु जैसी महत्वपूर्ण पहलें सफलतापूर्वक लागू की गईं। उन्होंने बताया कि 36 विभागों की 520 से अधिक सेवाएं सेवा सेतु के माध्यम से ऑनलाइन उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे नागरिक सेवाएं अधिक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध हुई हैं।
‘सतत समृद्धि के इंजन के रूप में पर्यटन’ विषय पर आयोजित सत्र में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सुमन बिल्ला ने कहा कि छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर, प्राकृतिक, जनजातीय और सांस्कृतिक पर्यटन के क्षेत्र में देश का अग्रणी हाई-वैल्यू, लो-इम्पैक्ट पर्यटन गंतव्य बनने की क्षमता रखता है। उन्होंने पर्यटन अवसंरचना, सामुदायिक भागीदारी और निवेश बढ़ाने पर जोर दिया।
‘सबका प्रयास के माध्यम से विकासपरक राजनीति’ विषय पर लोकसभा सांसद शशांक मणि त्रिपाठी ने जिला-केंद्रित विकास मॉडल की वकालत करते हुए कहा कि प्रत्येक जिले की स्थानीय आर्थिक क्षमता के अनुरूप विकास योजनाएं तैयार की जानी चाहिए। उन्होंने District GDP, Amrit Prayas और Banyan Revolution जैसी अवधारणाओं पर भी विस्तार से चर्चा की।
समापन सत्र में डॉ. विनय सहस्त्रबुद्धे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सुशासन, नेतृत्व विकास और प्रभावी नीति-क्रियान्वयन के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार साझा किए।
शिविर के दौरान उभरती प्रौद्योगिकियां, कृषि, पर्यटन, नेतृत्व विकास और विकासपरक राजनीति जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तृत प्रस्तुतियां दीं। नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), 5G, ड्रोन, ब्लॉकचेन, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा आधारित प्रशासन की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
वहीं कृषि से समृद्धि विषय पर डॉ. रमेश चंद और टी. विजय कुमार ने प्राकृतिक खेती, जलवायु-अनुकूल कृषि, फसल विविधीकरण, मूल्य संवर्धन और आधुनिक तकनीक के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने के सुझाव दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चिंतन शिविर 3.0 से प्राप्त सुझाव आने वाले समय में राज्य की नीतियों, प्रशासनिक सुधारों और विकास कार्यक्रमों की आधारशिला बनेंगे तथा विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण को नई गति मिलेगी।
