लाइफस्टाइल डेस्क, 17 जून 2026
गर्मियों की तपिश के बाद आने वाला मानसून न केवल लोगों को राहत देता है, बल्कि पौधों के लिए भी नई ऊर्जा लेकर आता है। बारिश के मौसम में पौधों की ग्रोथ तेजी से होती है और बगीचा अधिक हरा-भरा नजर आता है। हालांकि, केवल बारिश का पानी ही पौधों की सभी जरूरतों को पूरा नहीं करता। यदि समय रहते देखभाल न की जाए तो जलभराव, जड़ों का सड़ना, फंगस और कीटों का प्रकोप पौधों को नुकसान पहुंचा सकता है।
1. गमलों की ड्रेनेज व्यवस्था जांचें
मानसून से पहले यह सुनिश्चित करें कि गमलों के नीचे बने ड्रेनेज होल खुले हों। अतिरिक्त पानी का सही निकास न होने पर जड़ें सड़ सकती हैं और पौधों की वृद्धि रुक सकती है।
2. सूखी और खराब पत्तियों की सफाई करें
सूखी, पीली और रोगग्रस्त पत्तियों को हटाने से पौधों को नई ग्रोथ के लिए पर्याप्त जगह मिलती है। इससे फंगस और संक्रमण फैलने की संभावना भी कम हो जाती है।
3. मिट्टी को पोषक तत्वों से भरपूर बनाएं
बारिश का मौसम पौधों की तेज बढ़वार का समय होता है। ऐसे में मिट्टी में वर्मीकम्पोस्ट, जैविक खाद या गोबर की खाद मिलाकर पौधों को अतिरिक्त पोषण दिया जा सकता है।
4. फंगस और कीटों से बचाव करें
नमी बढ़ने के कारण मानसून में फंगस और कीट तेजी से पनपते हैं। पौधों की नियमित जांच करें और आवश्यकता पड़ने पर नीम के तेल या प्राकृतिक कीटनाशकों का उपयोग करें।
5. खरपतवार हटाना न भूलें
बरसात में खरपतवार तेजी से बढ़ते हैं और पौधों के पोषक तत्वों को अवशोषित कर लेते हैं। इसलिए समय-समय पर खरपतवार निकालना जरूरी है।
6. पौधों को सही स्थान पर रखें
कुछ पौधे तेज बारिश और हवाओं को सहन नहीं कर पाते। ऐसे पौधों को सुरक्षित स्थान या शेड के नीचे रखें, जबकि बारिश पसंद करने वाले पौधों को खुली जगह पर रखा जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून शुरू होने से पहले की गई थोड़ी-सी तैयारी पूरे मौसम में आपके गार्डन को स्वस्थ, हरा-भरा और आकर्षक बनाए रखने में मदद कर सकती है।


