ईरान, 15 जून 2026
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बाद शांति समझौते का रास्ता साफ हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोनों देशों के बीच 14 शर्तों पर हुए पीस डील का ऐलान किया है। इस समझौते के बाद ईरान की सेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इसे अपनी बड़ी जीत करार दिया है।
ईरान के खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ने जारी बयान में कहा कि देश की जनता और सशस्त्र बलों ने यह साबित कर दिया कि दुश्मन के पास सरेंडर करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। सेना ने दावा किया कि अमेरिका और इजरायल को ईरान के सामने झुकना पड़ा और यह समझौता उसकी रणनीतिक एवं कूटनीतिक सफलता का प्रमाण है।
बयान में यह भी कहा गया कि अमेरिका के साथ हुए समझौते को लेकर सतर्कता बरती जाएगी और ईरान अमेरिका की गतिविधियों पर लगातार नजर रखेगा। तेहरान ने इस समझौते को मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) का नाम दिया है।
वहीं ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने कहा कि सुप्रीम लीडर के मार्गदर्शन और जनता के समर्थन से कई महीनों की कठिन वार्ताओं के बाद अमेरिका के साथ समझौते का मसौदा तैयार किया गया। परिषद के अनुसार समझौते के तहत युद्ध और सैन्य अभियान समाप्त होंगे तथा ईरान के खिलाफ नौसैनिक नाकेबंदी भी हटाई जाएगी।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोला जाएगा और ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। ट्रंप ने इसे क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया।
जानकारी के अनुसार, इस शांति समझौते पर 19 जून को जेनेवा में हस्ताक्षर किए जाएंगे। ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची शामिल होंगे, जबकि अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस प्रतिनिधित्व करेंगे। ट्रंप के भी कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।


