जगदलपुर। मानसून के आगमन के साथ ही डायरिया, मलेरिया, उल्टी-दस्त और अन्य मौसमी बीमारियों के खतरे को देखते हुए बस्तर संभाग का स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। वर्षाकाल में किसी भी स्वास्थ्य आपात स्थिति से निपटने के लिए संभाग के सातों जिलों में 180 विशेष कॉम्बेट दलों का गठन किया गया है, जबकि प्रत्येक विकासखंड में अलग से चिकित्सा सहायता टीम भी तैयार रखी गई है।
संयुक्त संचालक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. महेश सांडिया ने बताया कि वर्षा ऋतु के दौरान दूरस्थ और पहुंचविहीन क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न हों, इसके लिए उप स्वास्थ्य केंद्रों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के पास जीवन रक्षक दवाइयों का पर्याप्त भंडारण किया गया है। आश्रम-छात्रावासों में भी आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराई गई हैं तथा अधीक्षकों को इनके उपयोग का प्रशिक्षण दिया गया है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार संभाग में 177 डायरिया प्रभावित संभावित क्षेत्रों, 538 संवेदनशील ग्रामों, 810 पहुंचविहीन गांवों तथा 638 संभावित बाढ़ प्रभावित इलाकों की पहचान कर विशेष निगरानी शुरू कर दी गई है। इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य अमले को सतर्क रहने तथा समुदाय के सहयोग से बीमारी की रोकथाम के निर्देश दिए गए हैं।
डॉ. सांडिया ने बताया कि मितानिनों की मुख्यमंत्री दवा पेटी में नियमित रूप से दवाओं की रिफिलिंग सुनिश्चित की जा रही है। वहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी पर्याप्त मात्रा में दवाओं का भंडारण किया गया है। हाट-बाजारों में नियमित स्वास्थ्य शिविर लगाने तथा समस्याग्रस्त गांवों पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
पेयजल जनित बीमारियों की रोकथाम के लिए हैंडपंपों और पक्के कुओं सहित विभिन्न जल स्रोतों का क्लोरीनेशन और ब्लीचिंग पाउडर के माध्यम से शुद्धीकरण कराया जा रहा है। स्थानीय समुदाय की सहभागिता से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में भी विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे केवल शुद्ध पेयजल का उपयोग करें, ताजा और गर्म भोजन का सेवन करें, घर और आसपास साफ-सफाई बनाए रखें तथा पानी का जमाव न होने दें। मलेरिया से बचाव के लिए मच्छरदानी का उपयोग करने और बुखार, उल्टी-दस्त जैसी शिकायत होने पर तत्काल निकटतम स्वास्थ्य केंद्र में संपर्क कर उपचार कराने की सलाह दी गई है।
बारिश के मौसम में संभावित स्वास्थ्य संकट को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की यह तैयारी बस्तर के दूरस्थ और संवेदनशील इलाकों में रहने वाले हजारों लोगों के लिए राहत और सुरक्षा का भरोसा लेकर आई है।



