मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से डॉ. प्रेमासाई महाराज ने की सौजन्य भेंट, सुशासन, संस्कृति और बस्तर विकास पर हुई चर्चा

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से डॉ. प्रेमासाई महाराज ने की सौजन्य भेंट, सुशासन, संस्कृति और बस्तर विकास पर हुई चर्चा

रायपुर, 24 जून 2026

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मां मातंगी दिव्य धाम के पीठाधीश डॉ. प्रेमासाई महाराज ने मुख्यमंत्री निवास में सौजन्य भेंट की। इस दौरान दोनों के बीच समसामयिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विषयों पर सार्थक चर्चा हुई।

डॉ. प्रेमासाई महाराज ने मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश में सुशासन, विकास और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सनातन संस्कृति, भारतीय परंपराओं और सामाजिक मूल्यों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। साथ ही धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम जैसे निर्णयों को सांस्कृतिक अस्मिता और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

वहीं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने डॉ. प्रेमासाई महाराज द्वारा धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों के संरक्षण के साथ-साथ सेवा, सद्भाव और नैतिक चेतना के प्रसार के लिए किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने उनके प्रयासों को समाज के लिए प्रेरणादायी बताया।

भेंट के दौरान डॉ. प्रेमासाई महाराज ने अपने बस्तर प्रवास के अनुभव साझा करते हुए कहा कि कभी नक्सलवाद की चुनौतियों से प्रभावित रहा बस्तर अब विकास, शांति, सुरक्षा और समृद्धि के नए दौर में प्रवेश कर रहा है। उन्होंने कहा कि शासन की जनकल्याणकारी नीतियों और सुरक्षा बलों के प्रयासों से क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं।

उन्होंने बताया कि बस्तर के विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित दिव्य दरबारों में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी हो रही है, जिससे समाज में आध्यात्मिक चेतना और सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो रहा है।

बैठक में प्रदेश के सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विकास से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई। डॉ. प्रेमासाई महाराज ने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ विकास, सुशासन, सांस्कृतिक गौरव और जनकल्याण के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।

इस दौरान उन्होंने कुनकुरी में पांच दिवसीय दिव्य दरबार, दो दिवसीय पदयात्रा और हिंदू जगाओ पदयात्रा आयोजित करने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रत्येक गांव में देवगुड़ी स्थापना तथा कम से कम 10 लोगों को इस पावन धाम से जोड़ने का संकल्प लिया गया है।

उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करना, आदिवासी समाज को अपनी मूल परंपराओं और संस्कृति से जोड़ना तथा सांस्कृतिक जागरूकता का प्रसार करना है। यह अभियान सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक संरक्षण और जनजागरण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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