आंध्र प्रदेश 2july2026 कहते हैं कि शिक्षक सिर्फ पढ़ाते नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर अपने छात्रों के लिए अभिभावक भी बन जाते हैं। आंध्र प्रदेश के पार्वतीपुरम मान्यम जिले से सामने आई एक घटना ने इस बात को सच साबित कर दिया। यहां आदिवासी कल्याण गर्ल्स आश्रम स्कूल की वार्डन हेमानी ने इंसानियत की ऐसी मिसाल पेश की, जिसे देखकर हर कोई उन्हें सलाम कर रहा है।
सातवीं कक्षा की 11 वर्षीय छात्रा भुवनेश्वरी छुट्टियों में अपने गांव गई हुई थी। अचानक उसे तेज बुखार, उल्टियां और असहनीय पेट दर्द शुरू हो गया। गांव तक सड़क और एम्बुलेंस की सुविधा नहीं थी। परिवार परेशान था और बच्ची की हालत लगातार बिगड़ रही थी। जैसे ही वार्डन हेमानी को इसकी जानकारी मिली, उन्होंने एक पल भी गंवाए बिना गांव का रुख किया।
हालात की गंभीरता को समझते हुए हेमानी ने किसी सरकारी मदद का इंतजार नहीं किया। उन्होंने बच्ची को कपड़े से अपनी पीठ पर बांधा और करीब तीन किलोमीटर लंबे पथरीले, फिसलन भरे और घने जंगल के रास्ते पैदल चल पड़ीं। कठिन सफर तय करने के बाद वे बच्ची को सड़क तक लेकर पहुंचीं, जहां पहले से मौजूद वाहन से उसे तुरंत पार्वतीपुरम जिला अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने बच्ची को आईसीयू में भर्ती किया और अब उसकी हालत में सुधार बताया जा रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। लोग वार्डन हेमानी को “रियल हीरो”, “धरती का फरिश्ता” और “ममता की मूर्ति” कहकर उनकी जमकर सराहना कर रहे हैं। हेमानी ने अपनी बहादुरी पर सिर्फ इतना कहा, “मैं सिर्फ अपनी छात्रा की जान बचाना चाहती थी। ऐसे समय में मुश्किलों के बारे में सोचने का वक्त नहीं होता।”
यह घटना साबित करती है कि कर्तव्य और संवेदनशीलता जब साथ हों, तो कोई भी मुश्किल रास्ता इंसानियत के आगे छोटा पड़ जाता है।

