बारिश बनी किसानों की सबसे बड़ी मुसीबत: सड़क डूबते ही चोखनपाल का संपर्क टूटा, पुल-पुलिया की मांग फिर हुई तेज

बीजापुर के चोखनपाल गांव में पहली ही बारिश ने खोली विकास की पोल, खेतों तक पहुंचना मुश्किल; ग्रामीण बोले—‘रास्ता नहीं तो खेती भी नहीं’

बीजापुर, 3 जुलाई। मानसून की पहली ही बारिश ने बीजापुर जिले के चोखनपाल गांव के किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खेतों तक जाने वाली कच्ची सड़क पानी में डूब जाने से किसानों का आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। हालात ऐसे हैं कि न किसान समय पर अपने खेतों तक पहुंच पा रहे हैं और न ही फसल को बाजार या मंडी तक ले जाने की व्यवस्था बची है।

ग्रामीणों का कहना है कि हर साल बरसात के तीन से चार महीने गांव का संपर्क लगभग कट जाता है। खेतों तक जाने वाला यही एकमात्र रास्ता बारिश के दौरान जलमग्न हो जाता है। ट्रैक्टर और बाइक तो दूर, पैदल चलना भी जोखिम भरा हो जाता है। इसका सीधा असर खेती-किसानी और ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है।

खेती से लेकर शिक्षा और इलाज तक प्रभावित

किसानों के अनुसार बरसात के मौसम में सड़क बंद होने से फसल समय पर मंडी नहीं पहुंच पाती, जिससे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। वहीं बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है क्योंकि स्कूल पहुंचना मुश्किल हो जाता है। किसी के बीमार पड़ने पर अस्पताल तक पहुंचना भी बड़ी चुनौती बन जाता है।

वर्षों से पुल-पुलिया की मांग, अब तक केवल आश्वासन

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासन के सामने पुल-पुलिया निर्माण की मांग रखी, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला। धरातल पर अब तक कोई ठोस पहल नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। उनका कहना है कि यदि इस मार्ग पर पुलिया बन जाए तो बरसात के दौरान होने वाली अधिकांश समस्याओं का समाधान हो सकता है।

नई सड़क परियोजनाओं से जगी उम्मीद

जानकारों का मानना है कि ऐसे क्षेत्रों में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) या मनरेगा के तहत पुल-पुलिया और कॉजवे का निर्माण कराया जा सकता है। हाल ही में बीजापुर जिले के लिए 140 करोड़ रुपये से अधिक की सड़क परियोजनाओं को मंजूरी मिली है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि चोखनपाल को भी इन परियोजनाओं में शामिल किया जाएगा, ताकि वर्षों पुरानी समस्या का स्थायी समाधान हो सके।

ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि चोखनपाल की इस गंभीर समस्या को प्राथमिकता देते हुए जल्द पुल-पुलिया का निर्माण कराया जाए, जिससे किसानों को बरसात के मौसम में खेती, आवागमन और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए संघर्ष न करना पड़े।

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