गरियाबंद, 1 जुलाई। वन्यजीव अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR) के एंटी-पोचिंग दल ने ‘ऑपरेशन सेफ पैसेज’ के तहत सक्रिय एक अंतर्राज्यीय वन्यजीव तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ किया है। संयुक्त कार्रवाई में दो आरोपियों को दो बाघों की खाल के साथ गिरफ्तार किया गया है। प्रारंभिक जांच में दोनों आरोपियों के पुलिस विभाग से जुड़े होने की जानकारी सामने आने से मामला और भी गंभीर हो गया है।
यह कार्रवाई उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के एंटी-पोचिंग दल, वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) के केंद्रीय और पश्चिमी क्षेत्र, राज्य स्तरीय फ्लाइंग स्क्वॉड, पश्चिम भानुप्रतापपुर वन मंडल तथा गरियाबंद पुलिस के संयुक्त अभियान के तहत की गई।
दो बाघों की खाल के साथ धराए तस्कर
संयुक्त टीम ने महाराष्ट्र–छत्तीसगढ़ सीमा पर कार्रवाई करते हुए बाबूराव मडावी और बिजेश्वर गेडाम को एक मोटरसाइकिल सहित गिरफ्तार किया। तलाशी के दौरान उनके कब्जे से दो बाघों की खाल बरामद हुई। मामले में पश्चिम पारलकोट परिक्षेत्र, पश्चिम भानुप्रतापपुर वन मंडल, जिला कांकेर में वन अपराध प्रकरण क्रमांक 390/09, दिनांक 29 जून 2026 दर्ज किया गया है।
घर से मिले पैंगोलिन के शल्क, बड़े नेटवर्क की आशंका
पूछताछ के दौरान आरोपी बिजेश्वर गेडाम, निवासी अहेरी (गढ़चिरौली, महाराष्ट्र) की निशानदेही पर उसके घर से बड़ी मात्रा में पैंगोलिन (सालखोर) के शल्क भी बरामद किए गए। इससे यह संकेत मिले हैं कि गिरोह केवल बाघों का ही नहीं बल्कि अनुसूची-1 के कई दुर्लभ वन्यजीवों की तस्करी में भी शामिल था।
जांच में यह भी सामने आया है कि दोनों आरोपी पुलिस विभाग से संबद्ध कर्मचारी हैं। इस खुलासे के बाद जांच एजेंसियां उनके नेटवर्क और अन्य संभावित सहयोगियों की तलाश में जुट गई हैं।
अबूझमाड़–इंद्रावती क्षेत्र में हुआ था बाघों का शिकार
प्रारंभिक जांच के अनुसार बरामद दोनों बाघों का शिकार इंद्रावती टाइगर रिजर्व–अबूझमाड़ लैंडस्केप में किया गया था। जांच एजेंसियां अब शिकार से लेकर तस्करी तक पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में लगी हैं।
400 किलोमीटर लंबे बाघ गलियारे की सुरक्षा को बड़ी सफलता
वन अधिकारियों के मुताबिक यह कार्रवाई गढ़चिरौली–इंद्रावती–अबूझमाड़–उदंती-सीतानदी–सुनाबेड़ा को जोड़ने वाले करीब 400 किलोमीटर लंबे वन्यजीव गलियारे की सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। यह कॉरिडोर महाराष्ट्र के बाघों के प्राकृतिक विस्थापन का प्रमुख मार्ग माना जाता है, जहां से बाघ नए आवासों की तलाश में उदंती-सीतानदी तक पहुंचते हैं।
यही गलियारा एशियाई हाथी, गौर (भारतीय बाइसन), जंगली भैंसा सहित कई दुर्लभ वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन और आनुवंशिक संपर्क बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाता है।
पहले भी मिल चुकी है बड़ी सफलता
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व की एंटी-पोचिंग टीम इससे पहले भी कई बड़ी कार्रवाई कर चुकी है। वर्ष 2023 में महाराष्ट्र और बीजापुर में संयुक्त अभियान चलाकर अंतर्राज्यीय शिकारी गिरोह का भंडाफोड़ किया गया था, जिसमें दो बाघों की खाल जब्त की गई थी। वहीं अप्रैल 2026 में अबूझमाड़ क्षेत्र में 9 विशाल भारतीय गिलहरियों का शिकार करने वाले आरोपी को भी गिरफ्तार किया गया था।

