बस्तर में विकसित होगा ‘सनराइज टू सनसेट’ पर्यटन सर्किट, टाटामारी की सुनहरी सुबह और पुसपाल का मनमोहक सूर्यास्त बनेगा आकर्षण

बस्तर में विकसित होगा ‘सनराइज टू सनसेट’ पर्यटन सर्किट, टाटामारी की सुनहरी सुबह और पुसपाल का मनमोहक सूर्यास्त बनेगा आकर्षण

बस्तर , 4 जून 2026

बस्तर अब केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विरासत के लिए ही नहीं, बल्कि नए पर्यटन केंद्र के रूप में भी पहचान बनाने की ओर बढ़ रहा है। कोण्डागांव वनमंडल द्वारा ग्राम पुसपाल को केंद्र में रखकर एक महत्वाकांक्षी ‘सनराइज टू सनसेट’ पर्यटन सर्किट विकसित किया जा रहा है, जो बस्तर के पर्यटन मानचित्र में नई पहचान जोड़ने वाला है।

इस परियोजना की सबसे खास बात यह होगी कि पर्यटक एक ही दिन में टाटामारी की पहाड़ियों से सूर्योदय और पुसपाल में सूर्यास्त का मनमोहक नजारा देख सकेंगे। प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक आस्था और रोमांचक गतिविधियों का अनूठा संगम इस सर्किट को विशेष बनाएगा।

केशकाल से चित्रकोट तक यात्रा होगी आसान

प्रस्तावित सर्किट के विकसित होने के बाद केशकाल से चित्रकोट जलप्रपात तक की यात्रा पहले से अधिक सुविधाजनक और कम समय में पूरी की जा सकेगी। पर्यटक टाटामारी से यात्रा शुरू कर चौत्यगृह, भोंगापाल और गोबरहीन जैसे धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण कर सकेंगे। गोबरहीन स्थित प्राचीन शिवलिंग क्षेत्र की महत्वपूर्ण आध्यात्मिक धरोहर माना जाता है।

नक्सल प्रभावित क्षेत्र में विकास की नई तस्वीर

कभी नक्सली गतिविधियों के लिए चर्चित यह क्षेत्र अब शांति, विकास और पर्यटन की नई पहचान बना रहा है। सरकार की योजनाओं, सुरक्षा बलों के प्रयासों और बेहतर हालात के चलते यहां पर्यटन की अपार संभावनाएं विकसित हो रही हैं। नया पर्यटन सर्किट इसी सकारात्मक बदलाव का प्रतीक माना जा रहा है।

स्थानीय युवाओं को मिलेगा रोजगार

परियोजना का उद्देश्य केवल पर्यटन बढ़ाना नहीं, बल्कि स्थानीय समुदायों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना भी है। पर्यटन गतिविधियों के विस्तार से युवाओं को गाइड, होमस्टे, परिवहन, खानपान, हस्तशिल्प और पर्यटन सेवाओं से जुड़े रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे।

राफ्टिंग और एडवेंचर स्पोर्ट्स होंगे आकर्षण

पर्यटकों की सुविधा के लिए यहां कॉटेज निर्माण, राफ्टिंग और एडवेंचर स्पोर्ट्स जैसी गतिविधियों को विकसित किया जाएगा। इससे प्रकृति प्रेमियों के साथ रोमांच पसंद पर्यटकों को भी नया पर्यटन गंतव्य मिलेगा।

दो जिलों की सीमा पर विकसित होगा प्रोजेक्ट

परियोजना का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा कोण्डागांव जिले के नारायणपुर सीमा क्षेत्र में और शेष 30 प्रतिशत हिस्सा बस्तर जिले के अंतर्गत विकसित किया जाएगा। इसके लिए प्रारंभिक खाका और बजट तैयार कर आवश्यक प्रक्रियाएं शुरू कर दी गई हैं।

परियोजना के पूरा होने के बाद टाटामारी से पुसपाल तक का पर्यटन सर्किट बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासत और विकास की नई तस्वीर देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत करेगा।

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