नबरंगपुर (ओडिशा), 4 जुलाई। ओडिशा के नबरंगपुर जिले से कर्तव्यनिष्ठा, साहस और सेवा भावना की एक प्रेरणादायक मिसाल सामने आई है। यहां पोलियो टीकाकरण अभियान के दौरान केवल पांच बच्चों तक जीवनरक्षक दवा पहुंचाने के लिए दो महिला स्वास्थ्यकर्मियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर उफनते इंद्रावती जलाशय को नाव से पार किया। उनका यह साहसिक प्रयास अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग उनकी जमकर सराहना कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, नबरंगपुर जिले के तेंतुलीखुंटी ब्लॉक अंतर्गत मंचागांव पंचायत का नुआ-ढेपागुड़ा गांव इंद्रावती जलाशय के दूसरी ओर स्थित है। इस गांव तक पहुंचने के लिए कोई सड़क मार्ग उपलब्ध नहीं है और आवागमन का एकमात्र साधन नाव है। बरसात के मौसम में जलाशय का जलस्तर बढ़ जाने और तेज बहाव के कारण यह सफर बेहद जोखिम भरा हो जाता है।
राष्ट्रीय पोलियो टीकाकरण अभियान के तहत गांव के पांच बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाई जानी थी। ऐसे में आशा कार्यकर्ता द्रौपदी जानी और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता तिल सांता ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद गांव पहुंचने का निर्णय लिया। दोनों महिलाएं एक देशी नाव के जरिए जलाशय पार करने निकलीं। सफर के दौरान तेज बहाव और बढ़े हुए जलस्तर के बीच उन्होंने नाव चलाने में भी सहयोग किया और सुरक्षित गांव तक पहुंचीं।
गांव पहुंचने के बाद दोनों स्वास्थ्यकर्मियों ने सभी पांच बच्चों को पोलियो की दवा पिलाई और यह सुनिश्चित किया कि कोई भी बच्चा टीकाकरण से वंचित न रहे। अभियान पूरा करने के बाद वे सुरक्षित वापस लौट आईं। इस पूरे सफर का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसे देखकर लोग दोनों महिलाओं की सेवा भावना और कर्तव्य के प्रति समर्पण की सराहना कर रहे हैं।
नबरंगपुर के अतिरिक्त जिला जनस्वास्थ्य अधिकारी मलय कुमार त्रिपाठी ने दोनों महिला कर्मियों के साहस की प्रशंसा करते हुए कहा कि स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य है कि कोई भी बच्चा पोलियो की खुराक से वंचित न रहे, चाहे वह कितना भी दूर या दुर्गम क्षेत्र में क्यों न रहता हो। उन्होंने कहा कि आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने अपने समर्पण और जिम्मेदारी से पूरे विभाग के लिए प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है।

